कश्मीर घाटी में शोपियां के सुगू में आज यानी कि बुधवार को सुरक्षाबलों ने पांच आतंकियों को ढेर कर दिया है। यह सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। सुरक्षाबलों ने दो सप्ताह में 27 आतंकियों को मार कर हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा समेत सभी बडे़ आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है। आतंकी संगठनों के कई मोस्ट वांटेड कमांडर मारे गए हैं। इससे पहले छह मई को ऑपरेशन जैकबूट में हिजबुल मुजाहिदीन का मुख्य कमांडर रियाज नायकू मारा गया था। फिर सुरक्षाबलों ने जुनैद सेहराई और उसके साथी आंतकी को ठिकाने लगाया था।
भारत माता के बेटों की इस रणनीति ने लिख दी 'आतंकवाद की मौत', पढ़ें 'ऑपरेशन जैकबूट से सुगू तक'
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दो मई को हंदवाड़ा में हुई आतंकी मुठभेड़ में कर्नल आशुतोष शर्मा समेत पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने बेगपोरा में ऑपरेशन जैकबूट चलाकर हिजबुल कमांडर रियाज नायकू और उसके साथी आतंकी को ढेर कर दिया था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत कई बार स्पष्ट तौर पर कह चुके हैं कि आतंकवाद के खात्मे के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। वहीं ऑपरेशन जैकबूट के बाद से हर दिन आतंकियों के लिए मौत बनकर आ रहा है।
बेगपुरा के बाद श्रीनगर के कानेमजार नवाकदल इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में जुनैद सहराई और पुलवामा निवासी तारिक अहमद शेख मारा गया था। 29 वर्षीय जुनैद सहराई सैयद अली शाह गिलानी के बाद तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन बने मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा था। साल 2018 के मार्च महीने में जुमे की नमाज के बाद जुनैद लापता हो गया था। इसके बाद वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ जुड़ गया था।
वहीं बीते दिनों पुलवामा जिले के कंगन में सुरक्षाबलों ने जैश-ए- मोहम्मद के टॉप पाकिस्तानी कमांडर और आईईडी एक्सपर्ट अब्दुल रहमान उर्फ फौजी भाई समेत तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। आतंकी फौजी पाकिस्तान में रहने वाले जैश सरगना मसूद अजहर का रिश्तेदार था। ऑपरेशन कंगन के बाद से जैश सरगना मसूद अजहर बौखलाया हुआ है। वहीं घाटी में खात्मे की कगार पर पहुंच चुका हिजबुल घबराया हुआ है। उसकी घबराहट का सबूत ये है कि बीते दिनों उसने आतंकी संगठनों से गुहार लगाई थी कि सभी एकजुट होकर हमले करें।
अब आपको बताते हैं उस अहम बैठक के बारे में जिसने आतंकी संगठनों को खात्मे की कगार पर पहुंचा दिया है। मई महीने के आखिरी सप्ताह में श्रीनगर में सेना, पुलिस और नागरिक प्रशासन की कोर ग्रुप की बैठक हुई थी। इस बैठक में तय किया गया था कि घाटी में विभिन्न तंजीमों के आतंकियों का सफाया करने के साथ ही उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने की सप्लाई लाइन को भी काटा जाएगा। धरपकड़ कर आतंकी तंजीमों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोका जाएगा।