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माह-ए-रमजान में हुए आतंकी हमले में खाली पेट शहीद हुए थे देश के दो लाल, शकूर को मारकर पूरा हुआ बदला

Sun, 21 Jun 2020 04:59 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 21 Jun 2020 04:59 PM IST
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sringar encounter and Srinagar terror attack in which Jawans had gone to get bread for Iftar
श्रीनगर मुठभेड़ - फोटो : बासित जरगर

कश्मीर के श्रीनगर में तीन आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। इस ऑपरेशन को सीआरपीएफ (क्विक एक्शन टीम), सीआरपीएफ की 115वीं व 28वीं बटालियन और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अंजाम दिया। मारे गए आतंकियों में शकूर भी शामिल है। शकूर वही आतंकी है जिसने अपने साथी आतंकी के साथ 20 मई को श्रीनगर के बाहरी इलाके  सूरा में बीएसएफ जवानों पर हमला किया था। आतंकियों ने ये कायराना हरकत उस वक्त की थी जब दोनों जवान इफ्तार करने के लिए ब्रेड लेने एक दुकान पर गए थे।



आगे की स्लाइड में पढ़िए 20 मई को की गई आतंकी शकूर की कायरता और आज पूरा हुआ बदला

 

sringar encounter and Srinagar terror attack in which Jawans had gone to get bread for Iftar
श्रीनगर मुठभेड़ - फोटो : बासित जरगर

20 मई दिन बुधवार, रमजान का पाक महीना। पूरा दिन भूखा रहकर रोजा रखकर अपनी नफ्स (इच्छा) पर काबू पाना। महीने भर रोजा रखकर साल भर बुरे कामों से बचना, यही तो संकल्प लिया जाता है, इस पाक महीने में। बीएसएफ कांस्टेबल जिया-उल-हक और राणा मंडल ने भी बुधवार को रोजा रखा था। शहीद होने से पहले जिया-उल-हक और राणा मंडल मगरिब के बाद (सूर्य अस्त के बाद) श्रीनगर के बाहरी इलाके में सूरा में इफ्तारी यानी इफ्तार करने के लिए ब्रेड लाने गए थे।

sringar encounter and Srinagar terror attack in which Jawans had gone to get bread for Iftar
श्रीनगर मुठभेड़ - फोटो : बासित जरगर

इस दौरान बाजार में बेकरी के नजदीक से गुजर रहे मोटरसाइकिल सवार आंतकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें दोनों मौके पर ही शहीद हो गए और आतंकी भीड़भाड़ वाली गलियों से निकलते हुए भाग गए। 

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sringar encounter and Srinagar terror attack in which Jawans had gone to get bread for Iftar
श्रीनगर मुठभेड़ - फोटो : बासित जरगर

उस दिन बीएसएफ की 37वीं बटालियन के जवानों ने कहा कि दोनों जवान रोजा होने की वजह से पूरे दिन पानी की एक बूंद पिये बिना ही इस दुनिया से रुख्सत हो गए। जवानों ने अपने साथियों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह बहुत जल्दी हमेशा के लिये अलविदा कह गए। साल 2009 में बीएसएफ में शामिल हुए हक के परिवार में माता-पिता, पत्नी नफीसा खातून और दो बेटियां... पांच साल की मूकबधिर बेटी जेशलिन जियाउल और और छह महीने की जेनिफर जियाउल हैं।

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श्रीनगर मुठभेड़ - फोटो : बासित जरगर

वह मुर्शिदाबाद कस्बे से लगभग 30 किलोमीटर दूर रेजिना नगर में रहते थे। मंडल के परिवार में माता-पिता के अलावा एक बेटी और पत्नी जैस्मीन खातून है। वह मुर्शिदाबाद में साहेबरामपुर में रहते थे। दोनों जवान केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद से कश्मीर में तैनात थे। वे आगामी दिनों में आने वाला ईद का त्योहार भी नहीं मना सके।

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