नब्बे साल के सैयद अली शाह गिलानी जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान परस्त सबसे बड़ा अलगाववादी चेहरा हैं। यह कश्मीर में रहकर पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा चलाते रहे हैं। अलगाववादी समूहों का नेतृत्व करने वाली ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष रहते कश्मीर में आतंकियों को उनका समर्थन रहा है। शुरुआती दौर में वह जमात-ए-इस्लाम नाम की सियासी तंजीम के सदस्य थे। बाद में उन्होंने तहरीक-ए-हुर्रियत की स्थापना की। गिलानी तीन बार अपने पैतृक इलाके बारामुला जिले के सोपोर क्षेत्र से क्रमश: 1972, 1977 और 1987 में विधायक भी रह चुके हैं।
पाकिस्तान परस्त सबसे बड़े अलगाववादी चेहरे की पूरी कहानी, तो इस वजह से नाराज थे गिलानी?
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पाकिस्तान परस्त होने के कारण उनकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा कश्मीरी जेल और श्रीनगर स्थित घर में नजरबंदी में ही बीता है। वह खुद को पाकिस्तानी समर्थक बताते हैं परंतु 21 जुलाई, 2015 को विदेश जाने के लिए जब पासपोर्ट की आवश्यकता थी तब उन्होंने लिखकर दिया कि वह भारतीय नागरिक हैं। गिलानी कश्मीर में रहकर भारत विरोधी एजेंडा जोर-शोर से चलाते आ रहे हैं। पाकिस्तान परस्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में होने वाले पाकिस्तान दिवस, ईद, बकरीद व अन्य मौकों पर गिलानी की मौजूदगी अपरिहार्य मानी जाती रही है।
गिलानी का जन्म 29 सितंबर, 1929 को बारामुला जिले के सोपोर के दुरु गांव में हुआ। प्राथमिक शिक्षा सोपोर में हुई। उच्च शिक्षा के लिए लाहौर गए, जहां कुरान और धार्मिक तालीम हासिल कर कश्मीर लौटे और शिक्षक बन गए। इसी दौरान वह सोपोर में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख कार्यकर्ता भी बन गए। गिलानी ने 1950 में राजनीतिक जीवन शुरू किया। गिलानी किडनी के कैंसर से पीड़ित बताए जाते हैं। संक्रमण के कारण उनकी एक किडनी निकाली जा चुकी है।
सैयद अली शाह गिलानी के पास लगभग 150 करोड़ की संपत्ति है। वह कई शिक्षण संस्थानों के भी मालिक हैं। जम्मू-कश्मीर के बाहर दिल्ली में भी उनके पास दो बेड रूम का फ्लैट है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का कहना है कि गिलानी का बेटा नसीम गिलानी परिवार की अचल संपत्ति के मामले देखता है।
गिलानीे के दो बेटे और तीन बेटियां
गिलानी, पत्नी जवाहिरा बेगम के साथ श्रीनगर के हैदरपोरा में रहते हैं। उनकी तीन बेटियां और दो बेटे हैं। एक बेटा नईम और उसकी पत्नी डॉक्टर है, जो पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहते थे। 2010 में दोनों भारत लौट आए। दूसरा बेटा नसीम गिलानी स्कास्ट में काम करने के साथ ही गिलानी ट्रस्ट के शिक्षण संस्थान देखता है। एक बेटी जाहिदा जेद्दाह में रहती हैं। दूसरी का नाम फरहत और तीसरी चस्फिदा है।