जब-जब कारगिल युद्ध की बात आती है सेना के एक ऐसे जांबाज का नाम जरूर आता है जिसने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों की धज्जियां उड़ा दी थीं। सेना के इस जांबाज विक्रम बत्रा को शेरशाह के नाम से जाना जाता था।
कारगिल के जांबाज विक्रम बत्रा की अनसुनी कहानी, जानिए किससे कहा- तू बाल बच्चेदार है हट जा पीछे
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कारगिल युद्ध की सबसे मुश्किल चुनौतियों में शुमार प्वाइंट 4875 पर मोर्चा संभालना लोहे के चने चबाने जैसा था। ऊपर चढ़ने की संकरी जगह और ठीक सामने दुश्मन का ऐसी पोजीशन पर होना जहां से आसानी से वो आपको अपना निशाना बना सकता है। इन सब मुश्किलों के बाद भी इस बहादुर के कदमों को दुश्मन रोक न सके।
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इसके बाद दुश्मन की गोली से विक्रम बत्रा शहीद हो गए। बाद में उनकी टीम ने प्वाइंट 4875 को वापस कब्जाने का लक्ष्य हासिल कर लिया। विक्रम बत्रा के अदम्य साहस और नेतृत्व प्रदर्शन के लिए उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया।
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