जब भी कारगिल के दौरान कोई मिशन सफल होता था तो कैप्टन विक्रम बत्रा जोर से बोलते थे - ‘ये दिल मांगे मोर' और अगले ऑपरेशन की तरफ चल पड़ते थे। हर मुश्किल घड़ी में कैप्टन विक्रम बत्रा के मुंह से मुश्किलों को चुनौती देने के लिए एक ही शब्द निकलता था ‘ये दिल मांगे मोर'।
कारगिल युद्धः जब विक्रम बत्रा से पाकिस्तानी घुसपैठिया बोला- हमें माधुरी दीक्षित दे दो, ऐसा मिला जवाब
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कैप्टन विक्रम बत्रा ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि, 'पाकिस्तानी घुसपैठिये और हम एक ही फ्रीक्वेंसी पर थे, और उन्होंने हमें चुनौती दी।
'शेरशाह ऊपर मत आना...' यह सुनकर मेरे सैनिक गुस्से में आ गए।
उन्होंने कहा, हमें धमकाने की हिम्मत कैसे हुई, हम उनको ठीक कर देंगे।
'दुर्गा माता की जय' बोलकर अपनी पलटन के साथ कैप्टन विक्रम बत्रा टूट पड़े। अपनी बंदूक से पांच सैनिकों को मार गिराया।
पाकिस्तानी सैनिक विक्रम बत्रा से कह रहे थे, "शेरशाह तुम वापस चले जाओ, नहीं तो तुम्हारी लाश वापस जाएंगी, विक्रम बत्रा ने पलटकर कहा था, "एक घंटे रुक जाओ, फिर पता चलेगा कि किनकी लाशें यहां से वापस जाती हैं।''
कैप्टन विक्रम बत्रा ने यह भी कहा, ‘हमारी चिंता मत करो, अपने लिए प्रार्थना करो'। इस लड़ाई में विक्रम बत्रा का कोड नेम 'शेरशाह' था'।
कैप्टन विक्रम बत्रा से जुड़ा एक वाकया हैं। एक पाकिस्तानी घुसपैठिया युद्ध के दौरान कैप्टन विक्रम बत्रा को बोला, ‘हमें माधुरी दीक्षित दे दो, हम नरमदिल हो जाएंगे। ' इस बात पर कैप्टन विक्रम बत्रा मुस्कुराए और इसका जवाब अपनी एके-47 से फायर करते हुए दिया और बोले, ‘लो माधुरी दीक्षित के प्यार के साथ’ और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया।
विक्रम का चयन पहले मर्चेंट नेवी में हुआ, लेकिन उन्होंने सेना में करियर को ही प्राथमिकता दी। उन्होंने मर्चेंट नेवी नहीं जाने का फैसला किया। जब उनकी मां ने उनसे पूछा 'कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो, क्यों मर्चेंट नेवी को छोड़ रहे हो ? ' विक्रम का जवाब था, 'जिंदगी में पैसा ही सब कुछ नहीं होता मां, मैं जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहता हूं, जिससे मेरे देश का नाम रौशन हो'।