त्यौहार आते हैं तो अपनी रौनक के साथ लाते हैं ढेर सारे स्वादिष्ट और पारम्परिक व्यंजन भी। ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इन व्यंजनों का स्वाद न लेना चाहता हो, बल्कि इस समय स्वाद के चक्कर में ही जरूरत से ज्यादा भी खाने में आ सकता है। यहाँ तक कि रेग्युलर डाइट रखने वाले अधिकांश लोग भी त्यौहार के समय में डाइट से समझौता करने को तैयार हो जाते हैं। उसपर अगर आपने डाइट प्लान या वेट लॉस की प्रक्रिया की ओर नए नए कदम बढ़ाये हैं, तब तो खुद को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है।
Diwali 2022: स्वाद के चक्कर में सेहत न बिगड़ने दें, दिवाली पर रखें इन बातों का ख्याल
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सबसे पहले मात्रा तय करें
साल में एक बार जब दीपावली पर गुझिये, मठरी, मिठाई आदि बनते हैं तो मात्रा इतनी होती है कि घर के साथ साथ घर आने वालों के लिए भी कम न पड़े। असल में इस त्यौहार ही खूबसूरती ही इस बात में है कि सब मिल बांटकर एक-दूसरे के घर में बने पकवानों का आनंद लें। लेकिन अक्सर यह मात्रा इतनी हो जाती है कि दीवाली के बाद हफ्ते-दस दिन तक डाइट पूरी तरह बिगड़ जाती है। यह व्यंजन खाने में सभी को स्वादिष्ट लगते हैं इसलिए इनको खाते समय कोई सीमा भी तय नहीं होती। बजाय इसके अगर इन व्यंजनों को दो हिस्सों में बांटकर बनाया जाए, यानी आधी मात्रा दीपावली के पहले और आधी दीपावली के 15 दिन बाद, तो न केवल खाने में कम आएगा, बल्कि आप लम्बे समय तक इनका आनंद भी ले पाएंगे।आपके घर मिलने जुलने आने वालों को भी आप इन्हें टेस्ट करवा सकते हैं और कुछ दिन थोड़ी थोड़ी मात्रा में खुद भी खा सकते हैं।
विकल्प चुनें
ट्रेडिशनल तरीकों से बनाये गए दीपावली के व्यंजन घी, शकर और तेल से सराबोर भी होते हैं। इन्हें ज्यादा मात्रा में खाने से किसी का भी पाचन बिगड़ सकता है और वे लोग जो पहले से ही डायबिटीज, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं, उनके लिए तो ये व्यंजन वर्जित ही हो जाते हैं। कोशिश करें कि आप इनके हेल्दी विकल्प चुन सकें। ताकि थोड़ी बहुत मात्रा में इनका सेवन वे लोग भी कर सकें जिन्हें डॉक्टर ने थोड़ी मात्रा में ये चीजें खाने के लिए कहा हो। उदाहरण के लिए मठरी के लिए गेहूं के मोटे आटे में, चने और जौ को भी पिसवा कर मिलवा लें और इनमें थोड़ा मोयन डालकर इन्हें बेक करें या घी में तलकर रख लें। इसी तरह गुझिया में ताजा खजूर, गुड़ और ताजा नारियल किस कर डालें। इन्हें भी आप बेक कर सकते हैं या चाहें तो मोदक की तरह भाप में भी पका सकते हैं। वहीं चिवड़े में मखाने, मूंगफली दाने, पोहा आदि सेक कर डालें। ऊपर से कम से कम तेल का छौंक लगा दें। ये डीप फ़्राय नहीं होंगे तो कम नुकसान पहुंचाएंगे। आप शकर की जगह गुड़, खजूर, खारक, आदि का इस्तेमाल भी कम मीठे के लिए कर सकते हैं। वहीं मेहमानों के सामने ताजे मौसमी फल, पॉपकॉर्न, लस्सी, नीबू पानी जैसे विकल्प भी रखे जा सकते हैं।
रेडीमेड व्यंजनों के लिए
आजकल यह भी एक आम चलन हो गया है। ज्यादातर घरों में नौकरी और घर की भागदौड़ की वजह से दीवाली के पारम्परिक व्यंजनों का भी ऑर्डर कर दिया जाता है। ऐसे कई लोग हैं जो त्यौहार के इस अवसर पर घरों से पारम्परिक व्यंजन बनाकर बेचते हैं। इससे कई लोगों को रोजगार भी मिलता है और आर्थिक संबल भी। यदि आप इन्हें चुन रहे हैं तो भी मात्रा और इंग्रेडिएंट्स का ध्यान जरूर रखें। यह भी देखें कि जहाँ से सामान बनकर आ रहा है उस जगह पर हाइजीन और सामग्री को लेकर कितना भरोसा किया जा सकता है। खासकर कोरोना महामारी के बाद इस बात को ध्यान में रखना और भी जरूरी हो जाता है। कोशिश यह करें कि आपके घर के पास स्थित किसी व्यक्ति को ही ऑर्डर दें।
व्यायाम को न टालें
इतना गरिष्ठ खाएं और दिवाली की छुट्टियों में व्यायाम को भी छुट्टी दे दें तो मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं। यह भी सही है कि दीपावली की सफाई और शॉपिंग में थोड़ा काम एक्स्ट्रा हो जाता है। ऊपर से त्यौहार में अन्य तैयारियां भी लगी रहती हैं लेकिन याद रखें, घर का काम कभी भी व्यायाम में नहीं गिना जाता। इसलिए बैलेंस करें। या तो सफाई व अन्य कामों के लिए किसी का सहयोग लें या फिर उतना ही करें जितने की आपका शरीर इजाजत देता है। बाकी बचे समय में अपना योग, ब्रिस्क वॉक या अन्य व्यायाम का रूटीन जारी रखें। खासकर यदि आप 45 वर्ष से ऊपर हैं और किसी प्रकार की सर्जरी या बीमारी से गुजर चुके हैं तो। दिवाली के समय अतिरक्त थकान और वातावरण में फैला धूल-धुआं आपको वैसे भी स्वास्थ्य संबंधी कई मुश्किलें दे सकता है। इसलिए इस समय सेहत का ख़ास ध्यान रखना जरूरी है।