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Alert: केरल में लेप्टोस्पायरोसिस रोग से किशोर की मौत, जानिए क्या है ये बीमारी और इसके लक्षण

Sat, 11 Oct 2025 05:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 11 Oct 2025 05:46 PM IST
सार

  • केरल के कोट्टायम जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शनिवार को लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज करा रहे 15 वर्षीय लड़के की मौत हो गई। 
  • मृतक में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण थे जिसको लेकर उसका इलाज चल रहा था हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का सही कारण पता चल पाएगा।

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15-year old boy with symptoms of leptospirosis died in Kerala know details about leptospirosis
केरल में लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा - फोटो : Adobe stock photos

देश का दक्षिणी राज्य केरल कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों को लेकर समय-समय पर चर्चा में रहता है। जुलाई-अगस्त में केरल में ब्रेन-ईटिंग अमीबा और फिर सितंबर के महीने में 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' की खबरें काफी चर्चा में रही थीं। अब केरल में बढ़ते एक नए खतरे को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं। 



हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार केरल के कोट्टायम जिले के सरकारी मेडिकल कॉलेज में शनिवार को लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज करा रहे 15 वर्षीय लड़के की मौत हो गई। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि मृतक की पहचान एस एच माउंट निवासी लेनान सी श्याम के रूप में हुई है। दसवीं कक्षा का छात्र होने के साथ-साथ यह किशोर फुटबॉल खिलाड़ी भी था। 

सूत्रों ने बताया कि श्याम में लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण थे जिसको लेकर उसका इलाज चल रहा था हालांकि अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत का सही कारण पता चल पाएगा। इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारी अलर्ट हो गए हैं। लोगों को इस खतरनाक रोग से बचाव लिए आवश्यक उपाय करते रहने की सलाह दी गई है।

15-year old boy with symptoms of leptospirosis died in Kerala know details about leptospirosis
चूहे के कारण होने वाली बीमारी - फोटो : Freepik.com

पहले भी आते रहे हैं लेप्टोस्पायरोसिस के मामले

गौरतलब है लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु जनित रोग है जिसे स्थानीय भाषा में "रैट फिवर" भी कहा जाता है।

लेप्टोस्पायरोसिस कोई नई बीमारी नही है, पिछले साल भी इसके कई मामले रिपोर्ट किए गए थे। सितंबर 2024 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण का शिकार हो गए थे। इससे पहले जून 2024 में सामने आई जानकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित करीब 11 राज्यों में भी इस रोग के मामले बढ़ते हुए देखे गए थे। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बरसात कि दिनों में जलजमाव वाली जगहों पर इस रोग को फैलाने वाले बैक्टीरिया अधिक पाए जाते रहे हैं। चूहों को इसका प्रमुख संचारक माना जाता है।

15-year old boy with symptoms of leptospirosis died in Kerala know details about leptospirosis
संक्रामक रोगों का बढ़ता खतरा और शोध - फोटो : Freepik.com

लेप्टोस्पायरोसिस है क्या?

लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होती है। चूहों के माध्यम से ये संक्रमण इंसानों में फैलता है। जानवरों के पेशाब (मूत्र) के संपर्क में आए भोजन-पानी या मिट्टी का नाक, मुंह, आंखों या घाव वाली त्वचा से संपर्क होने से ये संक्रमण हो सकता है। एक अनुमान के मुताबिक हर साल एक मिलियन (10 लाख) से अधिक लोग इस संक्रमण की चपेट में आते हैं। 

त्वचा पर खरोंच या कट के माध्यम से या फिर आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से आप लेप्टोस्पाइरा से संक्रमित हो सकते हैं। लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों और मनुष्यों के बीच संचारित होती है। बरसात के दिनों में जलजमाव वाली जगहों पर ये बैक्टीरिया अधिक पाए जाते हैं।

जानलेवा हो सकती है बीमारी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की केरल इकाई के डॉ. राजीव जयदेवन बताते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित 10 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है इसलिए जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों उन्हें समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार प्राप्त करना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान न हो पाने की स्थिति में रोग के गंभीर रूप लेने और जानलेवा होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

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15-year old boy with symptoms of leptospirosis died in Kerala know details about leptospirosis
लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की स्थिति (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

कैसे करें इस रोग की पहचान?

लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की स्थिति में रोगियों में शुरुआत में फ्लू जैसे लक्षण नजर आते हैं हालांकि गंभीर मामलों में इससे आंतरिक रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा हो सकता है। संक्रमण की शुरुआती स्थिति में तेज बुखार, आंखों में संक्रमण-लालिमा, सिरदर्द, ठंड लगने, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और पीलिया जैसी समस्या होती है। वहीं गंभीर स्थितियों में खांसी के साथ खून आने (हेमोप्टाइसिस), छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब में खून आने जैसे आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं।

लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की स्थिति कुछ मामलों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने या संक्रमण के बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण सांस लेने में तकलीफ और मेनिन्जाइटिस की दिक्कत होती है। मेनिनजाइटिस की समस्या में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की रक्षा करने वाली झिल्लियों में सूजन हो जाती है।




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स्रोत और संदर्भ
Leptospirosis: Causes, Symptoms, Diagnosis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत या फिर शोधपत्र के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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