देशभर में पिछले एक महीने से कोरोना संक्रमण के दैनिक मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। एक हफ्ते से दैनिक मामले 17 हजार के आसपास बने हुए हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना से 18,930 लोगों को संक्रमित पाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही संक्रमण के मामले लगातार स्थिर बने हुए हैं और केस में ज्यादा उछाल नहीं दर्ज किया जा रहा है लेकिन दैनिक रूप से 17 हजार के करीब मामले भी काफी चिंता बढ़ाने वाले हैं।
Covid-19 Test: बिना जीनोम सिक्वेंसिंग के भी जान सकेंगे, किस वैरिएंट से संक्रमित हैं आप? इसे ओमिक्रॉन भी नहीं दे पाएगा चकमा
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सार्स-सीओवी-2 के भी सब-वैरिएंट्स का लग सकेगा पता
अमेरिका स्थित टेक्सास यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक टीम ने कोरोना संक्रमण का तेजी से पता लगाने के लिए यह टेस्टिंग किट विकसित किया है। एक घंटे से भी कम समय में संक्रमण का पता लगाने के अलावा इस किट की खासियत यह है कि यह सार्स-सीओवी-2 वायरस के विभिन्न वैरिएंट्स का भी आसानी से पता लगाने में कारगर है। 4,000 से अधिक रोगियों के सैंपल टेस्टिंग में इसे काफी असरदार पाया गया है। यह ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स की भी आसानी से पहचान करने में सहायक है।
ओमिक्रॉन वेरिएंट्स का भी आसानी से लग सकेगा पता
क्लिनिकल केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में कोबारस्कैन नामक की इस टेस्टिंग किट के काफी प्रभावी परिणाम देखे गए हैं। शोधकर्ताओं ने इस किट के अध्ययन में पाया कि इससे कोरोना के अलग-अलग वैरिएंट्स जैसे डेल्टा, म्यू, लैम्ब्डा और ओमिक्रॉन सब-वैरिएंट की बड़ी आसानी से पहचान की जा सकती है। विशेषज्ञों ने अध्ययन में बताया कि पारंपरिक जांच माध्यमों में देखा गया कि ओमिक्रॉन के कुछ वैरिएंट्स टेस्ट को चकमा दे रहे थे, ऐसे में हमने इसमें उस तकनीकी पर विशेष ध्यान दिया है जिससे यह नए वैरिएंट्स की भी आसानी से पहचान कर सके। इसे पिछले साल आठ हॉटस्पॉट पर प्रयोग में लाया गया जहां से इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
टेस्ट किट विकसित करने वाले शोधकर्ताओं ने बताया कि इसके परीक्षण का परिणाम भी उतना ही सटीक है, जितना कोविड के निदान के लिए अब तक प्रयोग में लाए जा रहे टेस्ट से प्राप्त होता रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास साउथवेस्टर्न के शोधकर्ता जेफरी सोरेल कहते हैं, इस परीक्षण का उपयोग करके हम बहुत जल्दी यह निर्धारित कर सकते हैं कि व्यक्ति कोरोना वायरस के किस वैरिएंटस से संक्रमित है? यह टेस्टिंग किट यह भी बता सकता है कि क्या कोई नया वैरिएंट तो सामने नहीं आ रहा है? अब तक इसके परिणाम काफी आशाजनक रहे हैं।
जीनोम सीक्वेंसिंग की ही तरह अच्छे परिणाम का दावा
शोधकर्ताओं ने बताया कि होल जीनोम सीक्वेंसिंग की तुलना में कोबारस्कैन 96 प्रतिशत संवेदनशीलता के साथ संक्रमण की जांच करने और वैरिएंट्स का पता लगाने में मदद कर सकती है। जिस तरह से कोरोना के नए नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं ऐसे में कोबारस्कैन काफी मददगार हो सकती है।
भविष्य में अगर हमें इसे समायोजित करने की आवश्यकता होती है, तो हम आसानी से परीक्षण में 20 या 30 अतिरिक्त हॉटस्पॉट जोड़ सकते हैं। फिलहाल यह वैश्विक स्तर पर कब उपलब्ध होगा, इससे संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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स्रोत और संदर्भ
PCR-Based Screening Tests for SARS-CoV-2 Mutations: What Is the Best Way to Identify Variants?
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