लिवर की बीमारियां वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई रिपोर्ट की जा रही हैं। फैटी लिवर से लेकर लिवर डैमेज और लिवर फेलियर की समस्याओं का खतरा कम आयु के लोगों में भी देखा जा रहा है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण ये दिक्कतें हो सकती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि कुछ प्रकार की दवाएं भी शरीर के इस अंग के लिए नुकसानदायक साबित हो रही हैं?
Liver Health: हर्बल दवाएं भी बढ़ा सकती हैं लिवर डैमेज का खतरा, गिलोय का अधिक सेवन भी नुकसानदायक
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हर्बल दवाएं भी हो सकती हैं हानिकारक
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पियूष रंजन कहते हैं, सिर्फ एलोपैथिक ही नहीं हर्बल दवाएं भी इस अंग को क्षति पहुंचाती हुई देखी जा रही हैं। आजकल लोगों का झुकाव कॉम्प्लिमेंटरी एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन और हर्बल दवाओं की ओर बढ़ रहा है। ऐसा माना जाता रहा है कि ये दवाएं ज्यादा सुरक्षित होती हैं।
हर्बल दवाओं में भी एलोपैथिक दवाओं की तरह कुछ रासायनिक यौगिक हो सकते हैं। ऐसे में ये भी एलोपैथिक दवाओं की तरह लिवर को नुकसान पहुंचा सकती हैं, इस स्थिति को हर्बल इंड्यूस्ड लिवर इंजरी कहते हैं।
दैनिक इस्तेमाल वाले कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर भी रहें सावधान
अमेरिका में हुए एक अध्ययन के अनुसार, ड्रग इंड्यूस्ड लिवर इंजरी लगभग 20 प्रतिशत लोगों में रिपोर्ट की जाती है। भारत में भी कुछ सेंटर हैं, जो लगातार हर्बल इंड्यूस्ड लिवर इंजरी के बारे में रिपोर्ट करते रहते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार रोजाना खाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के रसायनिक अवलोकन के जरिये उनमें केमिकल इंग्रेडिएंट्स की डिटेल की मैपिंग की गई, जिसकी जानकारी कई हेल्थ जर्नल में प्रकाशित की गई हे। इसमें कुछ बहुत ही आम चीजें हैं, जैसे कि सभी लोग हल्दी का सेवन करते हैं। अधिक मात्रा में कच्ची हल्दी का सेवन करने से कुछ लोगों में हेपेटोटॉक्सिक यानी लिवर को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि इसका प्रतिशत बहुत कम होता है और इसमें ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
ज्यादा गिलोय भी हानिकारक
यह भी देखा गया है कि अगर काली मिर्च के साथ इसका सेवन किया जाए तो इससे हेपटोटोक्सिसिटी हो सकता है। यह लिवर के लिए हानिकारक होता है। कोविड के दौरान गिलोय एक वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में उभरकर आया था। उस समय गिलोय के सेवन के कारण होने वाली लिवर इंजरी काफी हद तक सामने आई थी।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
ग्रीन टी को हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करते हैं, इससे भी लिवर इंजरी हो सकती है। इसके अलावा वजन कम करने की कई दवाएं भी लिवर के लिए हानिकारक हो सकती हैं। कई आयुर्वेदिक दवाओं में हैवी मेटल्स, जैसे कि गोल्ड, मरकरी और आर्सेनिक होते हैं, जो लिवर के अलावा शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए किसी भी दवा के सेवन को लेकर बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।
लुभावने विज्ञापन के भ्रम में नहीं आना चाहिए और चिकित्सक की सलाह पर ही दवा खानी चाहिए।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।