लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। इसका आंखों की सेहत पर भी सीधा असर देखा जा रहा है। कम उम्र में ही धुंधला दिखना, पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत महसूस होना और ग्लूकोमा जैसी बीमारियां इसका संकेत है।
Eye Problems: गर्मियों में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना चाहिए या नहीं? क्या कहते हैं डॉक्टर
Motiyabind Ki Surgery Kab Karani Chahie: मोतियाबिंद को केवल उम्र का असर समझकर टालना नहीं चाहिए। समय पर पहचान, सही सर्जरी और ऑपरेशन के बाद सावधानी आपको आंखों की गंभीर समस्याओं से बचा सकती है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या गर्मियों में इसकी सर्जरी करानी चाहिए या नहीं?
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पहले मोतियाबिंद के बारे में जान लीजिए
मोतियाबिंद की सर्जरी कब करानी चाहिए और कौन-कौन सी सावधानियां जरूरी हैं? इसे समझने के पहले इस बीमारी के बारे में जान लेना जरूरी है।
- अमर उजाला से बातचीत में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ संजय साहनी बताते हैं, मोतियाबिंद के कारण आंखों में मौजूद प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है।
- आंख का लेंस पारदर्शी होता है, जो प्रकाश को रेटिना तक पहुंचाने में मदद करता है। जब यह लेंस धीरे-धीरे सफेद या धुंधला होने लगता है, तो व्यक्ति को स्पष्ट नहीं दिखाई देता।
- उम्र के साथ लेंस के प्रोटीन टूटने लगते हैं और उनकी संरचना बदल जाती है, जो इस तरह की बीमारी का कारण बनती है।
- हालांकि कुछ लोगों को ये समस्या जन्मजात, आंखों में चोट, डायबिटीज या लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के कारण भी हो सकती है।
सर्जरी से ठीक हो सकती है ये दिक्कत
डॉ कहते हैं, यदि आपको भी धुंधला दिखने, रोशनी से परेशानी होने या बार-बार चश्मा बदलने जैसी समस्या हो रही है, तो सबसे पहले नेत्र विशेषज्ञ से जांच करा लें। मोतियाबिंद की शुरुआती स्थिति में डॉक्टर चश्मा या कुछ दवाएं दे सकते हैं। हालांकि लेंस में गड़बड़ी को ठीक करने के लिए सर्जरी जरूरी हो जाती है।
- इसमें धुंधले लेंस को हटाकर उसकी जगह कृत्रिम लेंस लगाया जाता है।
- सर्जरी के कुछ दिनों में आमतौर पर आंखों की रोशनी ठीक होने लग जाती है।
गर्मियों में सर्जरी कराना सुरक्षित है या नहीं?
डॉ कहते हैं, अक्सर लोगों के मन में ये सवाल रहता है कि गर्मियों में सर्जरी से दिक्कत हो सकती है। हालांकि अब उन्नत इलाज और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं ऐसे में गर्मियों में भी सर्जरी करा सकते हैं। मौसम से ज्यादा महत्वपूर्ण स्वच्छता, सर्जन का अनुभव और ऑपरेशन के बाद की देखभाल है।
- आधुनिक तकनीक में तापमान को कंट्रोल करने और संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी उपाय किए जाते हैं।
- इसलिए गर्मी से सीधे सर्जरी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- गर्मियों में पसीना, धूल और तेज धूप अधिक होती है, इसलिए ऑपरेशन के बाद विशेष सावधानी बरतते रहने की जरूरत होती है।
किन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है?
मोतियाबिंद उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या है। 60 वर्ष के बाद इसका खतरा तेजी से बढ़ जाता है। कुछ अन्य कारण भी इसका जोखिम बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
- डायबिटीज के मरीजों में मोतियाबिंद का खतरा अधिक होता है, इसलिए शुगर कंट्रोल रखना जरूरी है।
- बढ़ा हुआ शुगर लेवल आंखों के लेंस को प्रभावित करता है।
- लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन भी जोखिम बढ़ाता है।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब के कारण भी लेंस की समस्याएं बढ़ने लग जाती हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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