महिलाओं के लिए मासिक का चक्र का नियमित रहना भी स्वस्थ रहने की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्थिति है। आजकल कई सारे कारणों से महिलाओं के जीवन की इस नियमित और प्राकृतिक प्रक्रिया में व्यवधान आने लगा है। केवल उम्रदराज महिलाओं में ही नहीं युवतियों और किशोरियों तक में सिस्ट की समस्या आम होने लगी है। चॉकलेट सिस्ट भी इसी का हिस्सा है। कुछ समय पूर्व प्रसिद्ध अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी इससे गुजर चुकी हैं।
Chocolate Cyst : चॉकलेट सिस्ट में होती है अनियमित पीरियड्स की समस्या, जानें इसके लक्षण और इलाज
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असामान्य ब्लीडिंग और पेटदर्द
कभी-कभार ज्यादा ब्लीडिंग, पेटदर्द या ब्लॉटिंग का अनुभव किसी भी महिला को हो सकता है। हर बार यह सिस्ट की वजह से ही हो यह जरूरी नहीं। लेकिन सिस्ट की वजह से यह अनियमितता निरतंर हो सकती है। चॉकलेट सिस्ट को चिकित्स्कीय भाषा में 'एंडोमेट्रिओसिस ऑफ ओवरी' या 'ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा' के नाम से जाना जाता है। ये सिस्ट ओवरी के भीतर पनपती हैं लेकिन ज्यादातर कैंसर रहित होती हैं। इनके भीतर तरल पदार्थ भरा होता है और दिखने में ये भूरे से रंग की होती हैं। जैसे पिघली हुई चॉकलेट हो। इसलिए ही इन्हें चॉकलेट सिस्ट का नाम दिया गया है। इनका यह रंग असल में शरीर में बच गए मासिक धर्म के खून और ऊतकों के कारण होता है जो सिस्ट की खाली जगह में भर जाते हैं। यह स्थिति एक ओवरी में भी बन सकती है और कई बार दोनों ओवरीज़ इसकी शिकार हो सकती हैं। यह संख्या में एक भी हो सकती हैं और ज्यादा भी।
लक्षण समझिए
सिस्ट की समस्या का प्रतिशत तेजी से महिलाओं में बढ़ रहा है। ख़ास बात यह है कि एंडोमेट्रियोसिस की समस्या से ग्रसित करीब 40 प्रतिशत महिलाओं में चॉकलेट सिस्ट होने की आशंका हो सकती है। इसलिए इसके लक्षणों को ध्यान में रखना जरूरी है। ताकि समय रहते डॉक्टर की सलाह से इलाज लेकर समस्या को नियंत्रण में रखा जा सके। इस समस्या के लक्षणों में शामिल हैं-
* पीरियड के समय तेज दर्द होना
* कमर या पेडू में दर्द जो कि बिना मासिक के भी हो रहा हो
* पीरियड्स का अनियमित होना
* कुछ महिलाओं में प्रजनन क्षमता में कमी आना
* यौन संबंधों के दौरान बहुत पीड़ा का होना, आदि
सिस्ट का आकार
यह भ्रान्ति कई लोगों को होती है कि अगर सिस्ट का आकार कम होगा तो तकलीफ नहीं होगी। जबकि असल में सिस्ट के आकार से अधिक पीड़ा का होना इस बात पर निर्भर करता है कि सिस्ट किस जगह पर है। ऐसे में वे महिलाएं जिनको जांच में सिस्ट कम आकार की आती है वे कई बार इसे बिना इलाज के छोड़ देती हैं जो कि गलत परिणाम दे सकता है। इस तरह की सिस्ट हालांकि किसी भी उम्र की महिला को हो सकती है लेकिन ज्यादातर इनके मामले गर्भधारण की उम्र वाली महिलाओं में देखने को मिलते हैं। कई बार इलाज न मिलने पर इसकी वजह से गर्भधारण में भी मुश्किलें आ सकती हैं। यदि किसी वजह से सिस्ट फट जाती है तो उस जगह पर अचानक तेज पेटदर्द हो सकता है। इस स्थिति में तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
डॉक्टर ऐसे लगाते हैं पता
वैसे तो अनियमित या अधिक पीड़ा वाले पीरियड्स ही इस तरह की सिस्ट का संकेत देने लगते हैं। लेकिन कई महिलाओं में लक्षण बहुत कम या न के बराबर हो सकते हैं। ऐसे में पेल्विक परीक्षण, जिसमें डॉक्टर को हाथ से परीक्षण के दौरान सिस्ट महसूस हो उससे, लक्षणों के आधार पर या बाकी सब ठीक होने के बावजूद गर्भधारण न हो रहा हो, इन सब बातों का परीक्षण कर डॉक्टर सिस्ट के लिए आगे सोनोग्राफी आदि की सलाह देते हैं। सोनोग्राफी के जरिये सिस्ट का पता तो चल जाता है लेकिन चॉकलेट सिस्ट है या नहीं इसके लिए डॉक्टर सिस्ट में से निडिल द्वारा द्रव्य लेकर जाँच करते हैं। इससे सिस्ट की प्रकृति भी पता चल जाती है।