दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। इस वायरस से अब तक तीन करोड़ से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी नौ लाख 45 हजार के पार चली गई है। इस मामले में भारत की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। यहां एक दिन में 90-95 हजार से भी अधिक मामले सामने आ रहे हैं। देश में अब तक इस वायरस से 51 लाख से भी अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और मरने वालों की संख्या भी 83 हजार के पार हो गई है। चूंकि कोरोना के शुरुआती लक्षणों में सर्दी-जुकाम शामिल हैं, ऐसे में अगर सामान्य जुकाम भी हो जाए तो डर लगने लगता है कि कहीं कोरोना तो नहीं है। ऐसे में क्या करना चाहिए, आइए इस सवाल का जवाब विशेषज्ञ से जानने की कोशिश करते हैं।
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Coronavirus: जुकाम में भी चिंता होने लगती है कि कहीं कोरोना तो नहीं, ऐसे में क्या करें? जानिए विशेषज्ञ की राय
Thu, 17 Sep 2020 05:19 PM IST
सोनू शर्मा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 17 Sep 2020 05:19 PM IST
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कोरोना वायरस से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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जुकाम में भी चिंता होने लगती है कि कहीं कोरोना तो नहीं, ऐसे में क्या करें?
- दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डॉ. नरेश गुप्ता बताते हैं, 'बदलते मौसम में कई बीमारियां आती हैं, जिनके लक्षण काफी हद तक कोरोना से मिलते-जुलते हैं। लेकिन अगर आप कोरोना से बचने के लिए बनाए गए नियमों का पालन करते हैं तो कई बीमारियों से बच सकते हैं। इन दिनों कई वायरल के मामले कम हो गए हैं। इसके अलावा कुछ बीमारियां ऐसी हैं, जो केवल मास्क लगाने से दूर नहीं होती हैं। उसके लक्षण कोरोना जैसे ही होते हैं, जैसे कि डेंगू, मलेरिया मच्छर के काटने से फैलता है। इससे बचने के लिए आसपास सफाई रखें, मच्छर न पनपने दें। लेकिन अगर कोरोना के लक्षण हैं या किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं तो एक बार जांच जरूर करा लें। जांच कराने से न घबराएं, अब सरकार ने बिना डॉक्टर के लिखे भी ऑन डिमांड जांच कराने की अनुमति दे दी है।'
कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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पॉजिटिव आने पर अस्पताल जाना है या होम आइसोलेशन में रहना है, यह कैसे तय किया जाता है?
- डॉ. नरेश गुप्ता के मुताबिक, 'सरकार ने ढील इसलिए दी है, क्योंकि अब लोगों में जागरूकता आ चुकी है। इसी के तहत अगर मरीज होम आइसोलेशन में रहना चाहते हैं, तो रह सकते हैं, लेकिन अगर लक्षण गंभीर हैं और ऐसा लग रहा है कि आगे स्थिति खराब हो सकती है, तो अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। इसके अलावा घर में अगर आइसोलेट होना है तो जरूरी है एक अलग कमरा और बाथरूम हो। घर में भी कोई देख-रेख के लिए हो। घर में रहने के लिए सभी सुविधाएं हों तभी रहें।'
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क्या किसी संक्रमित से हाथ मिलाने पर वायरस पूरे शरीर में फैल जाता है?
- डॉ. नरेश गुप्ता बताते हैं, 'हाथ मिलाने की जरूरत नहीं है, नमस्ते करें। अगर किसी संक्रमित से हाथ मिलाते हैं तो पूरे शरीर में वायरस नहीं फैलता है। वायरस उतनी ही जगह रहता है, जितने में व्यक्ति का हाथ संक्रमित के संपर्क में आया होता है। इसलिए हाथ मिलाने से या किसी के भी संपर्क में आने पर तुरंत साबुन या सैनिटाइजर से हाथ साफ करें। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि माना संक्रमित के हाथ से व्यक्ति के हाथ में 10 वायरस आए तो फिर वो पूरे शरीर में 100 नहीं होंगे, लेकिन अगर बिना हाथ धोए मुंह, नाक या आंख पर हाथ लगाया, तो वायरस शरीर के अंदर जाकर मल्टीप्लाई होने लगता है।'
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पल्स ऑक्सीमीटर का मानक क्या है?
- डॉ. नरेश गुप्ता के मुताबिक, 'जो लोग स्वस्थ हैं और फेफड़े की बीमारी नहीं है, तो इसकी रीडिंग 95-100 प्रतिशत के बीच में होनी चाहिए। अगर ये गिरने लगे और 92 प्रतिशत तक आ जाए तो इसका मतलब बीमारी बढ़ रही है। इसमें यह भी देखा गया है, कि अगर संक्रमण बढ़ता है, तो एकदम से परेशानी नहीं होती है बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। कई बार 80 तक गिरने पर मरीज को परेशानी का अहसास होता है। इसलिए अगर ऑक्सीमीटर की रीडिंग 92 से नीचे आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसका एक और पैमाना है, जिसमें अगर बेस लाइन लेवल नीचे गिरने लगे तो मान लेना है कि स्वास्थ्य ठीक नहीं है।'