रूस ने कोविड-19 के हल्के लक्षणों वाले मरीजों के लिए एक एंटी-वायरल दवा को मंजूरी दे दी है। इस दवा का नाम 'कोरोनाविर' (Coronavir) है और इसे आर-फार्म कंपनी ने बनाया है। कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि दवा अगले हफ्ते तक रूस की दुकानों में उपलब्ध हो जाएगी। कोरोनाविर को 'प्रिसक्रिप्शन ड्रग' के तौर पर मंजूरी मिली है यानी इसे डॉक्टर के सुझाए जाने पर ही खरीदा जा सकेगा। कोरोनाविर से पहले, मई में रूस की एक और दवा 'एविफाविर' (Avifavir) को भी मंजूरी मिली थी।
Coronavirus Medicine: रूस ने कोरोना की जिस दवा को दी मंजूरी, क्या उसे सभी ले सकते हैं?
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तीसरे चरण में 168 मरीजों पर ट्रायल
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ये दोनों दवाएं जापान में विकसित की गई दवा 'फेविपिरविर' (Favipiravir) के फॉर्म्युले पर आधारित हैं। फेविपिरविर भी एक एंटी वायरल दवा है, जिसका जापान में फ्लू और अन्य वायरल संक्रमण के इलाज में किया जाता है।
आर-फार्म ने बताया कि उसे कोरोना वायरस से संक्रमित 168 मरीजों पर तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के बाद कोरोनाविर के लिए मंजूरी मिली है। रूसी सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार इससे पहले कोरोनाविर को जुलाई में अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के मरीजों पर इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली थी।
कोरोना से जंग की रेस में आगे निकलने की होड़
जानकारों का कहना है कि नई दवा के बारे में रूस का ताजा एलान दिखाता है कि वो कोरोना वायरस से जंग की रेस में एक ग्लोबल लीडर के तौर पर सामने आना चाहता है। इससे पहले रूस ने कोविड-19 के लिए वैक्सीन स्पुतनिक-5 बनाया था और फिलहाल दूसरे देशों में इसके इस्तेमाल को मंजूरी दिलाने की कोशिशों में जुटा है।
रूसी वैक्सीन के भारत में लाने की तैयारियां भी चल रही हैं। रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) ने क्लिनिकल ट्रायल और देश में स्पूतनिक-वी की 10 करोड़ डोज के वितरण के लिए हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज लैब (डीआरएल) के साथ एक करार किया है। इसके अलावा वैक्सीन के उत्पादन के लिए भारत के पांच बड़े मैन्युफैक्चरर से बात चल रही है। ये उत्पादन न सिर्फ भारत के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगा।