Independence Day: पीएम की देश को नशा-मुक्त बनाने की अपील, जानिए नशा कैसे कर देता है पूरे शरीर का नाश
स्वतंत्रता दिवस 2026 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी परिवारों से नशामुक्त भारत अभियान से जुड़ने की अपील की। युवाओं में बढ़ती नशे की लत केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य चुनौती भी है। आइए जानते हैं कि नशे की लत का पूरे शरीर पर किस तरह से असर होता है?
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भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने समग्र विकास का विजन रखा। पीएम ने कहा, भारत का एक बड़ा सपना है- 2047 तक 'विकसित भारत' बनना। उन्होंने कहा, आज देश नए संकल्पों को लेकर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का भी आह्वान किया। उन्होंने सभी लोगों को देशव्यापी 'नशा मुक्त युवा अभियान' में शामिल होने की अपील भी की।
स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में पीएम ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन देश के युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है और इससे मिलकर निपटने की जरूरत है। नशा देश और उसके युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारत को नशा-मुक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। देश के भविष्य के लिए एक मजबूत और सक्षम युवा पीढ़ी जरूरी है।
गौरतलब है कि किसी भी तरह की नशीली चीजों का सेवन शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। नशीले पदार्थ कई तरह के कैंसर से लेकर चिंता-अवसाद और मानसिक बीमारियों का भी कारण बनते हैं। आइए जानते हैं कि नशा किस तरह से सेहत का नाश कर देता है?
पहले जान लीजिए, प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
लाल किले से संबंधोन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा-
पिछले दिनों माई भारत के वालंटियर्स, देश के कई एनजीओ, सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों और आध्यात्मिक पुरुषों ने मिलकर के नशा मुक्त भारत का 100 सप्ताह का कार्यक्रम तय किया है। मैं देश के हर परिवार को इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए अपील करता हूं। इसके साथ जुड़कर देश के नशा मुक्त भारत के सपने को साकार करिए।
भारत में नशे की तस्वीर को लेकर उपलब्ध राष्ट्रीय सर्वेक्षण बेहद गंभीर संकेत देते हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक, 10-17 साल के बच्चों में भी शराब, गांजा, जैसे नशीले पदार्थ, नशीली दवाओं तथा सूंघने वाले नशीले पदार्थों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।
- इस आयु वर्ग में करीब 30 लाख बच्चे शराब, 20 लाख गांजा, 40 लाख अफीम जैसे नशीले पदार्थ और 30 लाख सूंघने वाले नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करने वाले अनुमानित किए गए थे।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस उम्र में है जब दिमाग विकसित हो रहा होता है, ऐसे में किसी भी प्रकार के नशे की लत उनके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरा साबित हो सकती है।कम उम्र में नशे की शुरुआत आगे चलकर नशीले पदार्थों पर निर्भरता की समस्या का खतरा बढ़ा सकती है।
संपूर्ण स्वास्थ्य का नाश कर देती है नशा की लत
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि नशे की लत धीरे-धीरे पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। शराब की आदत लिवर, हृदय और कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली मानी जाती रही है, वहीं तंबाकू-धूम्रपान से कैंसर, फेफड़ों और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। नशे की लत चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, याददाश्त और निर्णय लेने की क्षमता पर असर तो डालती ही है साथ ही कई लोगों में इसके कारण मानसिक विक्षिप्तता तक की समस्या हो सकती है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर नशीले पदार्थों के इस्तेमाल से हर साल लगभग 6 लाख लोगों की मौते हो जाती हैं। इनमें करीब 4.2 लाख पुरुष और 1.6 लाख महिलाएं शामिल हैं।
- भारत में किसी भी रूप में तंबाकू के इस्तेमाल से लगभग सालाना 13.5 लाख मौतें होती हैं। तंबाकू कैंसर, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग गंभीर रोगों का प्रमुख जोखिम कारक है।
- नशे से जुड़ी दुर्घटनाएं, संक्रमण, हिंसा और दीर्घकालिक बीमारियां भी मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।