दुनियाभर में चल रहे कोरोना टीकाकरण अभियान के बीच वैक्सीन को लेकर एक बुरी खबर भी सामने आ रही है। दरअसल, जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड-19 वैक्सीन गुणवत्ता जांच में विफल हो गई है। इसकी पुष्टि कंपनी ने खुद की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन ने बताया है कि उसकी कोरोना वैक्सीन की एक खेप गुणवत्ता जांच में असफल रही है और वो इस्तेमाल करने लायक नहीं है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि खराब हुई खुराक की संख्या कितनी है। इसके अलावा अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इससे भविष्य में वैक्सीन की आपूर्ति कितनी प्रभावित होगी।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉनसन एंड जॉनसन ने बुधवार को कहा कि एमर्जेंट बायोसॉल्यूशंस द्वारा बनाई गई वैक्सीन सामग्री गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी। दरअसल, कंपनी ने हाल ही में वैक्सीन के निर्माण में तेजी लाने के लिए 10 कंपनियों के साथ करार किया है, जिसमें एमर्जेंट बायोसॉल्यूशंस भी शामिल है।
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माना जा रहा है कि बड़े पैमाने पर जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन की खुराक बर्बाद हुई है। हालांकि, कंपनी को उम्मीद है कि वो इस साल के अंत तक तक वैक्सीन के निर्माण के अपने अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर लेगी। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, 'हम 2021 के अंत तक एक अरब से अधिक खुराक बनाने के अपने लक्ष्य को पूरा कर लेंगे।'
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड-19 वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी थी। यह वैक्सीन 'वन शॉट डोज' पर आधारित है, यानी कोरोना से बचाव के लिए आपको इस वैक्सीन की सिर्फ एक ही खुराक लेनी होती है।
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क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया है कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन 67 फीसदी प्रभावी है। वहीं गंभीर बीमारी को रोकने में यह कोरोना वैक्सीन 85.4 फीसदी कारगर साबित हुई है। क्लिनिकल ट्रायल के डेटा के मुताबिक, यह बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों पर अधिक प्रभावी है।