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Study: एक हफ्ते की भी गड़बड़ नींद बढ़ा सकती है डायबिटीज का खतरा, कहीं आप भी न हो जाएं शिकार?

Sun, 15 Jun 2025 05:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 15 Jun 2025 05:27 PM IST
सार

  • नींद हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है, ये कई प्रकार के क्रोनिक बीमारियों के खतरे से बचाने में भी मददगार हो सकती है।
  • अध्ययन में पाया गया है कि सप्ताह भर की भी अनियमित नींद मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को 34 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।

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correlation between irregular sleep patterns and increased risk of type 2 diabetes
नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com

Irregular Sleep & Diabetes: अच्छी सेहत के लिए नींद कितनी जरूरी है ये हम सभी अक्सर पढ़ते-सुनते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, अच्छी नींद की भी उतनी ही आवश्यकता होती है। नींद पूरी न होने के कारण कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।



इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं अगर आप एक हफ्ते भी अच्छी नींद नहीं ले पा रहे हैं तो इससे भी टाइप-2 डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ सकता है। 

जर्नल डायबिटीज केयर में प्रकाशित इस अध्यययन की रिपोर्ट के मुताबिक नींद हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। सप्ताह भर की भी अनियमित नींद मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को 34 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।

आखिर नींद का डायबिटीज से क्या संबंध है, आइए इसे समझते हैं।

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डायबिटीज का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com

नींद की कमी और डायबिटीज का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो सात दिनों के नींद के गड़बड़ आदत की तुलना लंबे अवधि में नींद की समस्याओं के दुष्प्रभावों से नहीं की जा सकती है फिर भी हमें पता चलता है कि कुछ दिन भी नींद पूरी न होने की स्थिति और जीवनशैली में बदलाव के कारण भी स्वास्थ्य संबंधित खतरे बढ़ सकते हैं।

वहीं ये भी पता चलता है कि जो लोग रोज रात में अच्छी और निर्बाध नींद लेते हैं उनमें डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है।

ब्रिघम एंड वूमन्स हॉस्पिटल के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन ने अच्छी नींद की आवश्यकताओं को लेकर एक बार फिर से लोगों को अलर्ट किया है।

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नींद की कमी बढ़ा सकती है बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ता कहते हैं, टाइप-2 डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो दुनियाभर में लगभग आधे अरब से अधिक लोगों को प्रभावित करती है। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यह मृत्यु और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के प्रमुख कारणों की शीर्ष सूची में भी शामिल है।

पूर्वानुमानों के अनुसार साल 2050 तक इस खतरनाक रोग से प्रभावित लोगों की संख्या दोगुनी हो सकती, इसलिए मधुमेह की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास किए जाने आवश्यक हैं।

टीम ने इस शोध के लिए यूके बायोबैंक से 84,000 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा का गहन अध्ययन किया। प्रतिभागियों की औसत आयु 62 वर्ष थी, इनकी नींद को ट्रैक करने के लिए एक सप्ताह तक  उपकरण पहनने को दिए गए।

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नींद की कमी के स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com

अनियमित नींद के दुष्प्रभाव

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन प्रतिभागियों ने रात में 7-9 घंटे की अच्छी नींद ली, उनकी तुलना में अनियमित नींद (प्रतिदिन की नींद में औसतन 60 मिनट से अधिक की कमी) वाले प्रतिभागियों में मधुमेह विकसित होने का 34% अधिक जोखिम पाया गया।

जीवनशैली की आदतों और मोटापे जैसे अन्य कारकों में सुधार करने के बाद भी जिन लोगों में नींद की कमी थी उनमें इस रोग का जोखिम अधिक देखा गया। 

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आप भी न हो जाएं डायबिटीज का शिकार - फोटो : Adobe stock

क्या कहती हैं शोधकर्ता?

ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल की रिसर्च फेलो और अध्ययन की प्रमुख लेखिका सिना कियानेर्सी ने कहा, हमारे निष्कर्ष टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए नींद के पैटर्न में सुधार के महत्व को रेखांकित करते हैं। नींद की कमी मेटाबॉलिज्म सहित कई प्रकार की हार्मोनल समस्याओं को बढ़ा सकती है जिससे डायबिटीज का जोखिम रहता है।

वैसे तो 7 दिन की नींद की अवधि का आकलन दीर्घकालिक नींद के पैटर्न से नहीं किया जा सकता है फिर भी अगर इतनी कम अवधि की नींद में गड़बड़ी से खतरा बढ़ सकता है तो हमें बहुत सावधान हो जाने की जरूरत है।

कम उम्र से ही अच्छी नींद पर ध्यान देकर मधुमेह के जोखिमों के कम करने में मदद मिल सकती है।



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स्रोत
Irregular sleep patterns lead to increased risk of type 2 diabetes, study finds


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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