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Dengue: डेंगू को हल्के में लेने की न करें भूल, लिवर-किडनी जैसे अंग हो सकते हैं फेल; डॉक्टरों ने किया सावधान

Fri, 10 Oct 2025 08:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 10 Oct 2025 08:08 PM IST
सार

  • डेंगू की बीमारी एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से होती है, जो दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है। डेंगू का वायरस हमारे शरीर में पहुंचकर ब्लड सेल्स और इम्यून सिस्टम पर हमला करता है।

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dengue and malaria cases in delhi how dengue causes multiple organ failure
दिल्ली में डेंगू के मामले - फोटो : freepik.com

सितंबर और अक्तूबर का महीना हर साल दिल्ली-एनसीआर वालों की सेहत के लिए बड़ी मुसीबत बनकर आता है। इन महीनों में यहां मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस साल भी आलम कुछ ऐसा ही है।



हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले महीने से वेक्टर जनित बीमारियों में भारी उछाल आया है, जिसमें नोएडा में डेंगू मामले बढ़कर 430 और मलेरिया के केस 169 तक पहुंच गए हैं। इससे पिछले दो हफ्तों में डेंगू के 110 मामले बढ़ गए हैं। गाजियाबाद में भी स्थिति ऐसी ही है, जहां अब तक डेंगू के 178 और मलेरिया के 83 मामले सामने आए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सितंबर के शुरुआती हफ्ते तक रुक-रुक कर हुई बारिश और अगस्त के महीने में कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति के चलते डेंगू और मच्छर जनित अन्य रोगों के मामले बढ़ रहे हैं। इन बीमारियों का खतरा सभी उम्र के लोगों में हो सकता है इसलिए रोग से बचाव को लेकर अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।

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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com

डेंगू के बाद मल्टी ऑर्गन फेलियर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सप्ताह की शुरुआत में डेंगू से एक व्यक्ति की मौत के बाद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र हाई अलर्ट पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण में कार्यरत एक अधिकारी को डेंगू के बाद मल्टी ऑर्गन फेलियर की समस्या हो गई थी, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था जहां उसकी मौत हो गई। 

डॉक्टर्स का कहना है कि वैसे तो डेंगू के मामले हल्के इलाज के साथ ठीक हो जाते हैं पर कुछ लोगों में इससे गंभीर खतरों का भी जोखिम हो सकता है जिसको लेकर अलर्ट रहना जरूरी है।

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डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com

खतरनाक हो सकता है डेंगू

डॉक्टर बताते हैं, डेंगू की बीमारी एडीज एजिप्टी नामक मच्छर के काटने से होती है, जो दिन के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। डेंगू का वायरस हमारे शरीर में पहुंचकर ब्लड सेल्स और इम्यून सिस्टम पर हमला करता है। शुरुआत में मरीज को बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, और हल्के लाल दाने जैसे लक्षण दिखते हैं। अगर संक्रमण बढ़ जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से घटने लगती है, इससे ब्लीडिंग शुरू हो सकता है। यह स्थिति डेंगू हेमोरेजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम कहलाती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। जब वायरस शरीर में ज्यादा फैल जाता है, तो यह सिर्फ खून को नहीं बल्कि लीवर, किडनी, हृदय और मस्तिष्क जैसे अंगों को भी प्रभावित करने लगता है।

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डेंगू और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com

डेंगू के कारण मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डेंगू के गंभीर मामले विशेष रूप से डेंगू शॉक सिंड्रोम में मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम यानी एक या इससे अधिक अंगों के फेलियर का खतरा हो सकता है। रक्त वाहिकाओं से रिसाव के कारण ये समस्या होती है जिससे लिवर, किडनी, हृदय और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर असर हो सकता है। इसके लक्षणों में मानसिक स्थिति में बदलाव, श्वसन संबंधी परेशानी, गंभीर हाइपोटेंशन और किडनी-लिवर फेलियर का खतरा हो सकता है।

जर्नल ऑफ ट्रैवल मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन में डेंगू के गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर विशेषज्ञों ने अलर्ट किया। इस अध्ययन के लिए, सिंगापुर में जुलाई 2021 से अक्तूबर 2022 के बीच डेंगू से पीड़ित 11,707 और कोविड से पीड़ित 1,248,326 रोगियों की जांच की गई। प्रतिभागियों की संक्रमण के 300 दिन बाद तक स्वास्थ्य स्थितियों की निगरानी की गई। वैज्ञानिकों ने पाया कि डेंगू शरीर पर कई प्रकार से गंभीर प्रभाव डाल सकता है। कई मामलों में गंभीर डेंगू के कारण लिवर डैमेज होने, मायोकार्डिटिस और तंत्रिका संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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