Medically Reviewed by Dr. I.N. Vajpai
न्यूरो सर्जन
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.एस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (न्यूरो सर्जरी), उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
अनुभव- 45 वर्ष
गठिया रोग के बारे में तो आप जानते ही होंगे? भारत में करोड़ों लोग इसके शिकार हैं। यह ऐसी बीमारी है, जिसमें लोग जोड़ों में अधिक दर्द महसूस करते हैं। इसके साथ-साथ इस बीमारी में सूजन और अकड़न भी होती है। हालांकि गठिया के कई प्रकार है, जिसमें से एक ऑस्टियोआर्थराइटिस है, जो जोड़ों को प्रभावित करता है। वहीं, रूमेटाइड आर्थराइटिस भी गठिया का एक दूसरा प्रकार है, जो जोड़ों के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि गठिया के मरीजों को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है, जिससे बीमारी से राहत मिल सके। अगर आप गठिया के मरीज हैं तो आपको पता होना चाहिए कि इस बीमारी में आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। आइए जानते हैं कि गठिया के मरीजों को किन चीजों का सेवन करना चाहिए, जिससे उनकी परेशानी बढ़े नहीं।
सलाह: गठिया के मरीज जरूर करें इन चीजों का सेवन, परेशानियों को बढ़ने से रोकने में मिलेगी मदद
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लहसुन
- लहसुन में सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जो गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने में मददगार होता है। इसके अलावा यह हृदय रोग से भी बचा सकता है।
अदरक
- अदरक भी गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद करता है। कुछ साल पहले एक अध्ययन किया गया था, जिसमें गठिया के मरीजों को कुछ दिनों के लिए अदरक का रस पीने को दिया गया। बाद में यह पाया गया कि उन लोगों ने घुटनों के दर्द में राहत महसूस की।
ब्रोकली
- ब्रोकली पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह सूजन को कम करने में भी मदद करता है। इसमें ऐसे यौगिक होते हैं जो गठिया के लक्षणों को कम करने में मददगार होते हैं। अगर आप गठिया के मरीज हैं तो नियमित रूप से ब्रोकली की सब्जी खाएं या उसका सूप पीएं।
अखरोट
- यह भी पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसमें भी ऐसे यौगिक मौजूद होते हैं जो सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी पाया जाता है, जो गठिया को ठीक करने में मदद करता है। हालांकि इसको लेकर अभी और शोध की जरूरत है, लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है, यह फायदेमंद ही होगा।
नोट: डॉ. आईएन वाजपई अत्यधिक योग्य और अनुभवी न्यूरो सर्जन हैं। इन्होंने लखनऊ के केजीएमसी से अपना एमबीबीएस किया है। इसके बाद इन्होंने जनरल सर्जरी में एमएस किया और न्यूरो सर्जरी में एमसीएच की पढ़ाई की है। इन्होंने 1996 में कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया और 2012 में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष के रूप में रिटायर हुए। डॉक्टर आईएन वाजपाई आईएमए एंड न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉक्टर वाजपई को 45 वर्षों का अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।