देश के ज्यादातर हिस्से इन दिनों मानो तपती हुई भट्टी में बदल गए हैं। आसमान से बरसती आग ने हीट स्ट्रोक के जोखिमों को काफी बढ़ा दिया है। लिहाजा अस्पतालों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक लू लगने, तेज बुखार, ब्लड प्रेशर, चक्कर आने और पेट में गड़बड़ी वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है।
Summer Problems: गर्मियों में ज्यादातर लोग कर रहे हैं ये बड़ी भूल, तीन जाने-माने डॉक्टरों ने किया सावधान
डॉक्टरों के मुताबिक गर्मियों में शरीर से जरूरी मिनरल्स निकल जाते हैं। ऐसे में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं है, आपको इलेक्ट्रोलाइट्स पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गर्मियों में इलेक्ट्रोलाइट्स की जरूरत
मुंबई स्थित एक अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन की एडिशनल डायरेक्टर डॉ. दिव्या गोपाल कहती हैं, इस मौसम में खूब पानी पीते रहना तो बहुत जरूरी है ही, पर हीटस्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए सिर्फ पानी की नहीं, बल्कि सही तरह के इलेक्ट्रोलाइट्स की भी जरूरत होती है। जब तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और पसीना अधिक आता है, तो सिर्फ पानी पीना शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखने के लिए काफी नहीं होता।
- ज्यादा पसीना आने से शरीर से जरूरी मिनरल्स जैसे सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम भी निकल जाते हैं।
- ये सभी इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं। मांसपेशियों और नसों के सही काम करने में इनकी भूमिका होती है।
- इतना ही नहीं ये मिनरल्स शरीर में पानी का संतुलन भी बनाए रखते हैं। ऐसे में इनकी कमी डिहाइड्रेशन के साथ कई अन्य दिक्कतें बढ़ा देती है।
डॉ. दिव्या कहती हैं, अगर कोई व्यक्ति ज्यादा पसीना आने के बाद सिर्फ पानी पीता है, तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की मात्रा पूरी नहीं हो पाती। इससे थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, सिरदर्द, चक्कर आना और लगातार प्यास लगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
तेज गर्मी और ज्यादा पसीना आने की स्थिति में ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन), नींबू पानी में थोड़ा नमक डालकर पीना, नारियल पानी, छाछ और संतुलित भोजन जैसे तरीके अपनाए जा सकते हैं।
इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से कई अंगों को खतरा
एक अन्य अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज के प्रमुख डॉ. मुर्तजा एस बागवाला कहते हैं, बहुत गर्म मौसम में डिहाइड्रेशन की दिक्कत सबसे ज्यादा होती है।
- शरीर से पसीने के जरिए पानी के साथ सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी कम हो जाते हैं। अगर इसे समय पर ठीक न किया जाए तो यह कई अंगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- डिहाइड्रेशन की वजह से शरीर में गंभीर कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, थकान, ऊर्जा की कमी और ध्यान लगाने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- कई लोगों में ये लो ब्लड प्रेशर का कारण भी बन सकता है या फिर दिल की धड़कन तेज हो सकती है। इससे बेहोशी भी आ सकती है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज रहें खास सावधान
इंटरनल मेडिसिन और मेटाबॉलिक स्पेशलिस्ट डॉ. विमल पाहुजा कहते हैं, जिन लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी होती है, उनके लिए गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है। इन बीमारियों की दवाइयां भी शरीर में पानी और मिनरल बैलेंस को प्रभावित कर सकती हैं।
- जब शरीर से बहुत ज्यादा तरल पदार्थ निकल जाते हैं, तो इससे ब्लड वॉल्यूम भी घट जाती है। इससे खून का संचार भी कम हो जाता है, इस स्थिति को गंभीर रूप से हाइपोवोलेमिया कहा जाता है।
- हाई बीपी और हार्ट मरीजों में इससे खड़े होते ही चक्कर आने और बेहोशी का खतरा बढ़ जाता है।
- शरीर के जरूरी अंगों तक खून सही मात्रा में न पहुंचने से किडनी की भी समस्याएं हो सकती है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।