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Hypertensive Retinopathy: क्या आपको भी कम दिखता है, आंखों के आगे छाई रहती है धुंध? तो जरूर पढ़िए ये खबर

Thu, 24 Jul 2025 06:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 24 Jul 2025 06:59 PM IST
सार

  • हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी, लंबे समय से अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के कारण आंखों की रेटिना को प्रभावित करने वाली बीमारी है। यह तब होती है, जब उच्च रक्तचाप के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाएं संकरी, मोटी या लीक होने लगती हैं।

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आंखों की समस्या-धुंधला दिखाई देना - फोटो : Freepik.com

आंखों से संबंधित समस्याओं का जोखिम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। आंखों की समस्याएं सिर्फ आंखों से ही संबंधित हों ये जरूरी नहीं है, कई बार ये कई और स्वास्थ्य स्थितियों के कारण भी हो सकती हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और तंत्रिकाओं से बीमारी से परेशान लोगों में भी आंखों से संबंधित दिक्कत होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।



क्या आपको भी अक्सर धुंधला दिखने की समस्या बनी रहती है, आंखों के आगे कुछ स्पष्ट दिखता नहीं है? इसके लिए कौन सी वजहें जिम्मेदार हो सकती हैं?

आधुनिक जीवनशैली में उच्च रक्तचाप एक आम समस्या बन चुकी है। उच्च रक्तचाप के साथ जीना पहले से ही भारी लग सकता है, लेकिन जब यह आपकी दृष्टि को प्रभावित करने लगे तो यह और भी चिंताजनक हो जाता है। हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी ऐसी ही एक स्थिति है जिसके बारे में जानना और पहले से ही बचाव के उपाय करते रहना जरूरी हो जाता है।

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हाई ब्लड प्रेशर के कारण आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी- आंखों की गंभीर समस्या

हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी, लंबे समय से अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के कारण आंखों की रेटिना को प्रभावित करने वाली बीमारी है। यह तब होती है, जब उच्च रक्तचाप के कारण रेटिना की रक्त वाहिकाएं संकरी, मोटी या लीक होने लगती हैं, जिससे रेटिना को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। रेटिना वो परत है, जो आंख के पीछे होती है और प्रकाश को ग्रहण कर उसे मस्तिष्क को भेजती है, जिससे हम देख पाते हैं।

जब रक्तचाप अधिक होता है तो यह रेटिना की छोटी-छोटी रक्त नलिकाओं पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिसकी वजह से वे संकुचित हो सकती हैं, उनमें सूजन भी आ सकती है, रक्तस्राव हो सकता है और यहां तक कि रेटिना का कार्य बाधित हो सकता है।

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आंखों में रेटिना की समस्या - फोटो : adobe stock photos

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग नरूला कहते हैं, हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी, उच्च रक्तचाप के कारण रेटिना को होने वाली क्षति है। इसकी जटिलताओं को रोकने के लिए नेत्र परीक्षण द्वारा शीघ्र पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्तचाप को नियंत्रित करने से आंखों की इस समस्या को बढ़ने, रोकने या धीमा करने में मदद मिलती है।

हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता, यानी यह संक्रामक रोग नहीं है, इसका मुख्य कारण लंबे समय से अनियंत्रित रक्तचाप है। इस स्थिति के लिए मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान एवं शराब, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता जैसे कारक भी जिम्मेदार हैं। अगर आपको काफी समय से धुंधला दिखाई दे रहा है तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

कैसे करें इसकी पहचान?

हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी के शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन रोग के बढ़ने पर धुंधलापन, आंखों के सामने तैरते धब्बे या रेखाएं, दृष्टि में कमी हो सकती है। बहुत दुर्लभ स्थिति में आंखों की रोशनी पूरी तरह से खत्म हो सकती है।

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ब्लड प्रेशर रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com

आंखों की इस समस्या से बचाव कैसे करें?

हाइपरटेंसिव रेटिनोपैथी का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, परंतु इसके प्रभावों को रोका और नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए रक्तचाप को नियंत्रित करना, दवाओं का नियमित सेवन, जीवनशैली में बदलाव, खाने में नमक और वसा को कम करना, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन करना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र जांच कराना भी भविष्य में आपको इस समस्या से सुरक्षित रखने में सहायक हो सकता है।





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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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