उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपनी मालकिन की जान लेने वाले पिटबुल डॉग का मामला सामने आने के बाद से लोगों के मन में डर देखा जा रहा है। पालतू कुत्ते आक्रमक होकर इस तरह से जानलेवा हो सकते हैं, इस डर ने घर में कुत्ते पालने वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हर ब्रीड के कुत्ते का स्वभाव आक्रामक नहीं होता है। आक्रामक कुत्तों को पालने से बचें या फिर उनको लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहें। कुत्तों को काटने से होने वाले किसी भी तरह के खतरे से बचाव के लिए समय-समय पर उनका टीकाकरण और बचाव के उपाय करते रहना आवश्यक होता है।
सावधान: कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार बहुत आवश्यक, इन बातों का ध्यान रखकर कम कर सकते हैं गंभीरता
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले खतरा घाव के संक्रमण का रहता है। जहां तक बात रेबीज वायरस की है तो यह संक्रमित जानवर के लार के घाव के साथ सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है। रेबीज संक्रमण के लक्षण फ्लू के समान हो सकते हैं, जिसमें कमजोरी या बेचैनी, बुखार या सिरदर्द की समस्या होती है। काटने वाली जगह पर चुभन या खुजली भी बनी रह सकती है।
इस प्रकार के संक्रमण के जोखिम से बचने के लिए कुत्ते के काटने के आठ घंटे के भीतर रेबीज का इंजेक्शन लगवाना आवश्यक माना जाता है।
कुत्ते के काटने का प्राथमिक उपचार
डॉक्टर कहते हैं, कुत्ते के काटने के बाद शीघ्रता से इसके लिए प्राथमिक उपचार लेना चाहिए। यदि काटे हुए जगह पर घाव नहीं है तो उस हिस्से को गर्म पानी और साबुन से धो लें। आप एहतियात के तौर पर जीवाणुरोधी लोशन भी लगा सकते हैं। यदि काटने के बाद वहां जख्म है तो उस हिस्से को धोने के बाद कोई एंटीसेप्टिक लगाएं और तुरंत रेबीज के इंजेक्शन के लिए अस्पताल जाएं।
इन छह बातों का ध्यान रखें
कुत्ते के काटने के बाद प्रारंभिक तौर पर कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है।
- सबसे पहले घाव को धो लें। हल्के गुनगुने पानी और साबुन का प्रयोग करें।
- किसी साफ कपड़े की मदद से रक्तस्राव को कम करने की कोशिश करें।
- यदि आपके ओवर-द-काउंटर एंटीबायोटिक क्रीम है तो उसे लगाएं।
- प्राथमिक घरेलू उपायों के बाद तुरंत डॉक्टर से मिलें।
- डॉक्टर की सलाह पर रेबीज का इंजेक्शन लगवाएं।
- कुत्ते के काटने के लक्षणों जैसे लालिमा, सूजन, दर्द और बुखार आदि पर विशेष ध्यान रखें। इसके बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।