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Health Tips: सर्दियों में क्यों तेजी से बढ़ने लगता है यूरिक एसिड? जानें इससे बचाव के सरल उपाय

Thu, 06 Nov 2025 04:29 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Thu, 06 Nov 2025 04:29 PM IST
सार

यूरिक एसिड का तेजी बढ़ना हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। इससे जोड़ों में दर्द की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। ऐसे में ये यूरिक एसिड का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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Health Tips Why Uric Acid Levels Rise Rapidly in Winter Know Ways to Control Prevention
यूरिक एसिड - फोटो : Adobe Stock
Uric Acid Increase in Winter: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि ठंड के दिनों में जोड़ों से संबंधित समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसके पीछे का एक बड़ा कारण है शरीर में यूरिक एसिड का बढ़ना।

जैसे ही तापमान गिरना शुरू होता है, यूरिक एसिड के मरीजों की समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। सर्दियों में शरीर में अचानक यूरिक एसिड बढ़ने के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण हो सकते हैं, लेकिन उसके पहले ये जानते हैं कि यूरिक एसिड होता क्या है?

यूरिक एसिड एक प्राकृतिक अपशिष्ट उत्पाद है जो प्यूरीन नामक पदार्थों के टूटने से बनता है। सामान्य तौर पर, किडनी इसे फिल्टर करके शरीर से बाहर निकाल देती है, लेकिन सर्दियों में हमारी आदतें बदल जाती हैं, जिससे ये शरीर में बढ़ने लगता है। अक्सर इस मौसम में लोग पानी पीना कम कर देते हैं, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन होता है। किडनी को कम पानी मिलने के कारण वह यूरिक एसिड को अच्छे से बाहर नहीं निकाल पाती।

इसके अलावा ठंड के कारण शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और वजन बढ़ने लगता है। साथ ही गरमाहट के लिए लोग प्यूरीन से भरपूर चीजें (जैसे रेड मीट, अधिक तेल-मसाले वाले भोजन) खाना शुरू कर देते हैं। ये सभी कारक मिलकर शरीर में यूरिक एसिड को जमा करते हैं, जिससे जोड़ों में तेज दर्द और गाउट का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए आइए इस लेख में इससे बचने के कुछ उपायों के बारे में जानते हैं जिससे आप शरीर में यूरिक एसिड का संतुलन बनाए रख सकते हैं।


 
Health Tips Why Uric Acid Levels Rise Rapidly in Winter Know Ways to Control Prevention
यूरिक एसिड - फोटो : Adobe Stock

पानी की कमी और किडनी पर दबाव
सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण लोग अक्सर कम पानी पीते हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो जाती है। जब शरीर में पानी कम होती है, तो किडनी को यूरिक एसिड को घोलकर बाहर निकालने में मुश्किल होती है।

इससे यूरिक एसिड रक्त में जमा होने लगता है और क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जमा हो जाता है, जो गाउट के अटैक का सबसे बड़ा कारण बनता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना बहुत जरूरी होता है।


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यूरिक एसिड - फोटो : Adobe Stock

आहार में प्यूरीन का बढ़ना और कसरत की कमी
ठंड के दिनों में अक्सर लोग रेड मीट, समुद्री भोजन, और तेल व मसालों से भरपूर भोजन अधिक खाते हैं, इनमें प्यूरीन की मात्रा अधिक होती है। इसके साथ ही, ठंड और आलस की वजह से शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

प्यूरीन वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और कसरत की कमी, दोनों मिलकर शरीर में यूरिक एसिड तेजी से बढ़ाने लगते हैं। इसलिए इन चीजों को सीमित मात्रा में खाना चाहिए, साथ ही अपनी दिनचर्या में सक्रिय रहने के लिए कसरत भी करना चाहिए।

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यूरिक एसिड - फोटो : Adobe Stock

यूरिक एसिड से बचाव के सरल उपाय
यूरिक एसिड का संतुलन बनाए रखने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर गुनगुना पानी पीएं और हर्बल चाय पीने की आदत डालें। डाइट में प्यूरीन युक्त भोजन (जैसे कुछ तरह की दालें, रेड मीट) को सीमित करें। चेरी और नींबू पानी का सेवन यूरिक एसिड को बेअसर करने में सहायक माना जाता है। प्रोसेस्ड फूड्स और शराब का सेवन भी पूरी तरह से बंद करें।


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रोज सुबह व्यायाम करें - फोटो : Adobe Stock
जीवनशैली में बदलाव
सर्दियों में भी नियमित और हल्का व्यायाम जारी रखें। जॉगिंग के बजाय घर के अंदर योग, स्ट्रेचिंग या हल्की वॉक करें ताकि शरीर सक्रिय रहे। अगर जोड़ों में दर्द है, तो प्रभावित जगह की हल्की सिकाई करें। यदि आपको गाउट का अटैक महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द निवारक दवाएं न लें।

नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योग गुरु से संपर्क कर सकते हैं। गर्भावस्था में योग को लेकर डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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