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सावधान: बच्चे भी हृदय रोगों से सुरक्षित नहीं, गर्भावस्था में ऐसी गलती बढ़ा सकती है जोखिम, जानिए बचाव के तरीके

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 02 Oct 2022 03:50 PM IST
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बच्चों में हृदय रोग की समस्याओं का खतरा - फोटो : istock

दुनियाभर में तेजी से बढ़ती हृदय रोगों की समस्या विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई है। हृदय रोगों को एक दशक पहले तक अमूमन 50-60 की आयु में होने वाली समस्याओं के तौर पर देखा जाता था हालांकि अब कम उम्र (30-40 आयुवर्ग) के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के कारण मौत के भी कई मामले पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिले हैं। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों में भी हृदय रोगों के खतरे पर ध्यान देते रहने और समय रहते बचाव के उपाय करने के बारे में सचेत किया है।



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में हर साल 17.7 मिलियन (1.77 करोड़) मौतें हृदय संबंधी समस्याओं के कारण हो जाती हैं। इनमें में कॉग्नेटल हार्ट डिजीज  (सीएचडी) की समस्या भी शामिल है। 

जन्म के समय से ही  हृदय में संरचनात्मक समस्या होने की स्थिति को जन्मजात हृदय रोग (सीएचडी) के रूप में जाना जाता है। यह नवजात में सबसे आम जन्मजात विकारों में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सीएचडी की समस्या नवजात शिशुओं में भी देखी जा रही है, इसके लक्षणों के बारे में माता-पिता को जानकारी होना आवश्यक है। कुछ बच्चों के जन्म के कुछ समय बाद ही यह दिक्कत हो सकती है जबकि कुछ में आगे चलकर इसके विकसित होने का जोखिम रहता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

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बच्चों में बढ़ती हृदय रोग की समस्या - फोटो : iStock

बच्चों में कॉग्नेटल हार्ट डिजीज 


गर्भावस्था के अल्ट्रासाउंड के दौरान बच्चों में जन्मजात हृदय दोष का पता लगाया जा सकता है। बच्चों में हृदय की इस समस्या में कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं। इसमें कुछ बच्चों में  हृदय वाल्व से संबंधित दोष की दिक्कत हो सकती है, इसमें रक्त प्रवाह को निर्देशित करने वाले  हृदय के अंदर के वाल्व बंद हो जाते हैं या इनमें रिसाव हो सकता हैं। यह हृदय की रक्त को सही ढंग से पंप करने की क्षमता को प्रभावित करता है। 

बच्चों में इस समस्या के विकसित होने के कई कारण हो सकते हैं, आइए इसके लक्षणों और कारण के बारे में जानते हैं।

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हृदय रोग के लक्षणों को न करें अनदेखा - फोटो : istock

बच्चों में कॉग्नेटल हार्ट डिजीज के लक्षण
 

कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय दोष के लक्षण जन्म के कुछ समय बाद तक प्रकट नहीं होते हैं। इस स्थिति में अन्य संकेतों पर ध्यान देते रहने और उसके सही निदान की आवश्यकता होती है।

होंठ, त्वचा, उंगलियां और पैर की उंगलियां का नीला पड़ना, सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ, जन्म के समय कम वजन रहना, छाती में दर्द होना या वृद्धि में कमी के आधार पर इसके खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ बच्चों में हृदय की संबंधित समस्याएं देखी जा सकती हैं जिसमें तुरंत डॉक्टरी सलाह की आवश्यकता होती है।

  • असामान्य हृदय गति।
  • अक्सर चक्कर आना, कमजोरी।
  • सांस लेने में कठिनाई।
  • बेहोशी की समस्या।
  • शरीर में सूजन बना रहना।
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हृदय रोगों के कारण के बारे में जानिए - फोटो : istock

बच्चों में सीएचडी का कारण क्या है?

डॉक्टर्स कहते हैं, जन्मजात हृदय रोग, हृदय की संरचना में प्रारंभिक विकास संबंधी समस्याओं के परिणामस्वरूप होता है। इस प्रकार के दोष के कारण आमतौर पर हृदय के माध्यम से रक्त के सामान्य प्रवाह में समस्या आ सकती है। कई कारण हैं जो बच्चों में सीएचडी की समस्या पैदा कर सकते हैं। इसके लिए आनुवांशिकता को प्रमुख माना जाता है जिसमें अगर माता-पिता को हृदय रोग है तो इससे बच्चों में खतरा हो सकता है।  गर्भावस्था के दौरान कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, गर्भावस्था के दौरान शराब या ड्रग्स का सेवन भी शिशु में हृदय संबंधी दोष होने का खतरा बढ़ा देता है।

जिन माताओं को गर्भावस्था की पहली तिमाही के दौरान वायरल संक्रमण हुआ था, उनसे जन्म लेने वाले बच्चों में हृदय दोष का खतरा अधिक रहता है।

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हृदय की सेहत का ख्याल रखना जरूरी - फोटो : iStock

बच्चों में सीएचडी का इलाज और रोकथाम

जन्मजात हृदय दोष का पता चलने के बाद स्थिति के प्रकार और गंभीरता के आधार पर इलाज की प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाया जाता है। इसके लिए दवाइयों और कुछ सहायक उपकरणों की मदद ली जाती है। गंभीर स्थितियों में सर्जरी की भी आवश्यकता हो सकती है। बच्चे में इस प्रकार के खतरे को कम करने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें।

  • यदि आपको मधुमेह है, तो सुनिश्चित करें कि गर्भवती होने से पहले आपका रक्त शर्करा का स्तर नियंत्रण में रहे।
  • यदि आपको रूबेला या खसरा का टीका नहीं लगा है, तो किसी भी बीमारी के संपर्क में आने से बचें और रोकथाम के विकल्पों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।
  • यदि आपमें जन्मजात हृदय दोष का पारिवारिक इतिहास है, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें जिससे बच्चे को सुरक्षित रखने का उपाय किया जा सके।  
  • गर्भावस्था के दौरान शराब-धूम्रपान या किसी भी प्रकार की नशीली चीजों के सेवन से बचें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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