शरीर में होने वाली हर छोटी से बड़ी गतिविधि का सीधा संबंध दिमाग से होता है। पैरों को कब आगे बढ़ाना है, शरीर में कब खुजली करनी है, सोने-जागने से लेकर, खाने की इच्छा तक सब कुछ दिमाग द्वारा संचालित होता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ मस्तिष्क को शांत और स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक तनाव लेने वाले लोगों में समय के साथ डायबिटीज का भी जोखिम बढ़ जाता है।
Exclusive: ज्यादा गुस्सा-तनाव की स्थिति में मीठा खाने की क्यों होती है इच्छा? विशेषज्ञ से जानिए- मस्तिष्क और स्वाद का 'रहस्यमयी संबंध'
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तनाव के कारण बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा
शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से डायबिटीज का जोखिम होता है, उन्हें इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। पर तनाव की स्थिति में डेजर्ट की इच्छा पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता है, यह भी डायबिटीज को विकसित करने का कारण हो सकती है। पर आखिर तनाव का मीठे से क्या संबंध है?
इस बारे में डॉ उन्नीकृष्णन बताते हैं, तनाव की स्थिति में मस्तिष्क में कुछ ऐसी रसायनिक गतिविधियां होती है, जो आपकी मीठा खाने की चाहत को बढ़ा देती हैं। इसमें भी आपको खुशी महसूस कराने वाले न्यूरोट्रांसमीटर डोपामाइन का योगदान माना जाता है। कैसे आइए जानते हैं?
मीठा खाने की इच्छा
डॉ उन्नीकृष्णन बताते हैं, जब भी हम कुछ मीठा खाते हैं तो जीभ पर मौजूद स्वाद का एहसास कराने वाले रिसेप्टर्स उत्तेजित हो जाते हैं, जो तंत्रिका तंत्र के माध्यम से मस्तिष्क को विद्युत संकेत देते हैं। इसका परिणाम स्वरूप स्वाभाविक रूप से डोपामाइन का स्तर बढ़ जाता है जो हमें खुशी का एहसास करता है। यह हमें और अधिक मीठा खाने के लिए उत्तेजित करता है। इसको और बेहतर तरीके से समझने के लिए हमें मस्तिष्क के कार्यों के बारे में जानना आवश्यक है।
भावनात्मक स्थितियों में क्रेविंग
जब भी हम भावनात्मक क्षणों में होते हैं, जैसे तनाव-चिंता, क्रोध-दुख जैसी अनुभूतियों के दौरान शरीर एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल स्ट्रेस हार्मोन को रिलीज करता है। ये हार्मोन हृदय गति और रक्तचाप को बढ़ाने के साथ मेटाबॉलिज्म को भी गति देने का प्रयास करते हैं। इन स्थितियों में आपकी कमजोरी और थकान महसूस होती है जिससे छुटकारा पाने और शरीर को ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि ऐसी भावनात्मक स्थितियों में हमें मीठी चीजें और कार्बोहाइड्रेट युक्त चीजों को खाने की तीव्र इच्छा महसूस होती है।
डोपामिन कैसे बढ़ाता है मीठे की इच्छा?
कार्बोहाइड्रेट के पाचन के साथ ही रक्त में शर्करा का उत्पादन होने लगता है। शोध में पाया गया है कि मस्तिष्क की कोशिकाएं रक्त में मौजूद ग्लूकोज के प्रति सीधे प्रतिक्रिया करती हैं। शरीर में डोपामिन हिट होने की स्थिति में इसे मीठी चीजों के अधिक सेवन की इच्छा के कारण के तौर पर भी देखा जाता है। अधिक तनाव लेने की स्थिति में वजन बढ़ने या डायबिटीज होने की समस्या के जोखिम को लिए भी इसे कारक के तौर पर देखा जाता है। जब हम तनाव की स्थिति में अधिक मीठी चीजें या कार्बोहाइड्रेट का सेवन करते हैं तो यह वजन और मधुमेह दोनों को बढ़ाने का कारण बनती है।