Iron Deficiency Symptoms: अक्सर हम मानते हैं कि अगर हमारी ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य है, तो शरीर में खून की कोई कमी नहीं है। मगर डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण वीडियो साझा कर इस भ्रम को तोड़ा है। उन्होंने बताया कि आयरन का काम सिर्फ खून बनाना नहीं, बल्कि पूरे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाना भी है। आयरन की कमी होने पर आपका हृदय और मस्तिष्क दोनों कमजोर हो सकते हैं।
Health Tips: शरीर में आयरन की कमी होने पर दिखते हैं ये लक्षण, डॉक्टर ने बताई ये जरूरी बातें
Early Sign Of Iron Deficiency: शरीर में खून की कमी होने से काफी पहले ही शरीर हमे कुछ संकेत देने लगता है। अक्सर लोग उन संकेतों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आइए इस लेख में इन्हीं लक्षणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
आयरन की कमी होने पर शरीर में कौन से शुरुआती लक्षण दिखते हैं?
डॉक्टर सोलंकी के अनुसार, अगर आपको सुबह उठते ही थकान महसूस होती है और शरीर रिचार्ज नहीं हो पाता, तो यह आयरन की कमी है। इसके अलावा सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा काम करने पर छाती में 'घड़-घड़' (धड़कन तेज होना) महसूस होना, एक्सरसाइज करने की हिम्मत न होना और मांसपेशियों में कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं। यह शरीर में कम ऑक्सीजन सप्लाई का नतीजा होता है।
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मस्तिष्क और व्यवहार पर आयरन की कमी का क्या असर पड़ता है?
आयरन की कमी सीधे आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। जब मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, तो दिमाग 'स्लो' काम करने लगता है और फोकस कमजोर हो जाता है। डॉक्टर ने बताया कि ऐसे में व्यक्ति की मीठा खाने की इच्छा भी बढ़ जाती है, क्योंकि शरीर ऊर्जा के लिए इंस्टेंट एनर्जी की तलाश करता है। साथ ही महिलाओं में मासिक धर्म के बाद भी लंबे समय तक कमजोरी बनी रहना आयरन की कमी का बड़ा संकेत है।
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क्या बाहरी शारीरिक लक्षण भी आयरन की कमी की चेतावनी देते हैं?
जी हां, डॉक्टर सोलंकी ने कुछ स्पष्ट शारीरिक संकेतों का भी जिक्र किया है। अगर आपके मुंह के कोने फटने लगे हैं या जीभ में लगातार जलन का अहसास होता है, तो यह आयरन की कमी का स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा मांसपेशियों की कमजोरी के कारण रोजमर्रा के छोटे काम करना भी दूभर हो जाता है। इन लक्षणों का मतलब है कि आपके शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल गिरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
यह खबर हमें सिखाती है कि स्वास्थ्य केवल एक लैब रिपोर्ट के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। हीमोग्लोबिन नॉर्मल होने पर भी आयरन की कमी आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर सोलंकी की यह सलाह महत्वपूर्ण है क्योंकि समय पर आयरन की कमी को पहचानकर हम हृदय और मस्तिष्क की गंभीर समस्याओं से बच सकते हैं। अपने शरीर के संकेतों को सुनें और केवल हीमोग्लोबिन नहीं, बल्कि 'फेरिटिन' टेस्ट के जरिए आयरन के लेवल की जांच करवाएं।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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