खान-पान, जीवनशैली में हुए परिवर्तन का खामियाजा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के रूप में बड़ी तेजी से दिखाई दे रहा है। आज से कुछ सालों पहले तक की भारतीय जीवनशैली और रहने-खाने के तौर तरीके पूरी तरह बदल चुके हैं। अब तक हम यह मानते थे कि विदेशों में लोग अधिक मैदा, चीज, बटर, मांसाहार आदि खाते हैं और ज्यादा मात्रा में अल्कोहल का सेवन करते हैं, इसलिए वहां मोटापा या अन्य जीवनशैली संबंधी बीमारियां आम हैं। यह बात कुछ हद तक सही भी है लेकिन अब भोजन और जीवनशैली के लिहाज से हमारा देश भी उसी दिशा में बढ़ रहा है। लिहाजा स्वास्थ्य समस्याएं भी समान होती जा रही हैं। डायबिटीज जैसी समस्या जो पहले हमारे देश में कम लोगों में सामने आया करती थी और वह भी ज्यादातर उम्रदराज लोगों में, अब वह बच्चों और युवाओं में भी आम होती जा रही है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्तमान में हम डायबिटीज विस्फोट की स्थिति में बैठे हैं। इस समस्या की गंभीरता जितनी अधिक है उतना ही आसान है इसे नियंत्रित करना भी। इसलिए ही कहा जाता है कि डायबिटीज है तो डरिये नहीं, तुरंत नियंत्रण के प्रयास कीजिये।
Diabetes: डायबिटीज से डरिए नहीं इस तरह रखिए शुगर को नियंत्रित
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सामान्य तरीके, अधिक लाभ
डायबिटीज की समस्या ध्यान न देने पर जितना गंभीर रूप ले सकती है, उससे कहीं अधिक आसान है इसपर नियंत्रण कर पाना। हां, शुरुआत में रूटीन को बदलने और निरंतरता बनाये रखने में थोड़ी दिक्कत आती है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह दिक्कत उस राहत के आगे कुछ भी नहीं जो नियंत्रित शुगर के स्तर को देखकर होती है। डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए किये जाने वाले अधिकतर उपाय भी आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट बैठ सकते हैं। जरूरत बस एक बार इरादा पक्का करने की होती है। कई शोध इस परिणाम पर पहुंचे हैं कि कुछ बातों को जीवन में लागू करके आसानी से प्री-डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज को नॉर्मल स्तर पर लाया जा सकता है।
फिर से काम शुरू कर सकती हैं बीटा कोशिकाएं
यही वह खबर है जिसने डायबिटीज की शुरुआती सीढ़ी पर खड़े या प्री-डायबिटिक लोगों के लिए खुशखबर का काम किया है। अब तक हुए शोध में यह बात सामने आई थी कि आपको डायबिटीज है, जांच में इस बात के सामने आते ही यह भी स्पष्ट हो जाता है कि आपके पैंक्रियाज की कोशिकाओं की कार्यक्षमता खत्म हो गई। यानी कि पैंक्रियाज की बीटा सेल्स खत्म हो चुकी हैं। यह वही कोशिकाएं हैं जो इन्सुलीन हार्मोन बनती हैं जिससे खून में शकर का स्तर नियंत्रित रहता है। अब कुछ नए शोध इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि समय पर ध्यान दिया जाए और थोड़ी सतर्कता बरतकर उपाय किए जाएँ तो ये कोशिकाएं फिर से उत्पन्न हो सकती हैं और अपने काम पर लग सकती हैं।
शुरूआती सतर्कता
डायबिटीज हो या प्री डायबिटीज, दोनों ही स्थितियों में शुरूआती समय बहुत नाजुक होता है। यदि आप अपना नियमित चैकअप करवाते हैं तो आपको बढ़े हुए ब्लड शुगर स्तर का पता चलता है, अन्यथा कई बार तो किसी समस्या के होने पर यह सामने आता है कि आप डायबिटिक या प्री डायबिटिक हैं। इसलिए सबसे पहले दो बातों का ध्यान रखें-
- यदि आपके परिवार में डायबिटीज की समस्या है तो अपने डॉक्टर से नियमित अंतराल पर ब्लड शुगर की जांच करवाते रहें। इससे आपको समय रहते समस्या को पकडने और इलाज शुरू करने में आसानी होगी।
- यदि आपके परिवार में किसी को डायबिटीज नहीं है तो भी 35 की उम्र के बाद अपनी वार्षिक जांचें अवश्य करवाएं। कई बार जीवनशैली में बहुत बदलाव, खान-पान का अनियमित होना, किसी प्रकार का हार्मोनल असंतुलन, महिलाओं में मेनोपॉज, घर या दफ्तर का स्ट्रेस आदि भी डायबिटीज का कारण बन सकते हैं।
ऐसे लाएं बदलाव
सबसे पहली चीज है आपकी डाइट और भोजनशैली। केवल डायबिटीज ही नहीं लगभग हर बीमारी की जड़ में कहीं न कहीं पेट होता ही है। इसलिए इससे ही शुरुआत करें। अपनी डाइट पर ध्यान दें लेकिन सही तरीके से। किसी एक प्रकार की डाइट को चुनने या खाने की चीजों को त्याग देने से बात बिगड़ भी सकती है क्योंकि आपके शरीर को संतुलित मात्रा में सभी तरह का पोषण चाहिए होता है। यहाँ तक कि शकर भी। इसलिए अपने भोजन के पैटर्न को बदलें और छोटे छोटे बदलाव करें। जैसे सबसे पहले अपने खाने में नियमित फल, सलाद, अंकुरित अनाज, बीन्स, दही, साबुत अनाज, आदि को शामिल करें। इससे आपको वैरायटी भी मिलेगी, स्वाद भी और पूरा पोषण भी। जूस या कार्बोनेटेड ड्रिंक्स को पूरी तरह पानी, छाछ, नीबू पानी (बिना शकर का) से रिप्लेस कर दें।