दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा 1.99 करोड़ पार कर चुका है, जिनमें से 1.28 करोड़ से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 7.31 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भारत समेत कई देश इसकी वैक्सीन बनाने के काफी करीब हैं, लेकिन आम लोगों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होने में अभी देर है। वहीं, इसके इलाज या उपचार की बात करें तो कोरोना से 100 फीसदी सुरक्षा देने वाली कोई निश्चित और ठोस दवा उपलब्ध नहीं है कि कोरोना संक्रमण होने पर आप किसी मेडिकल स्टोर से खरीद कर खा लें और ठीक हो जाएं। हालांकि कई दवाओं ने क्लिनिकल ट्रायल में असर दिखाया है, लेकिन कई दवा और उपचार के तरीकों पर आपत्ति भी जताई जा चुकी है। क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर ही अलग-अलग देशों में कुछ दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है, लेकिन डॉक्टर की निगरानी में। आइए जानते हैं कोरोना के उपचार के लिए उपलब्ध दवाओं और विकल्पों के बारे में:
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Coronavirus Treatment: कोविड 19 का इलाज ढूंढने में हम कहां तक पहुंचे हैं?
Mon, 10 Aug 2020 04:36 PM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Mon, 10 Aug 2020 04:36 PM IST
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Coronavirus Treatment
- फोटो : Amar Ujala
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Coronavirus Drug Update
- फोटो : Amar Ujala
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में कोरोना के लिए न तो कोई लाइसेंस प्राप्त उपचार है और न ही वैक्सीन। पिछले साल दिसंबर में सामने आया सार्स-कोव-2 चूंकि नया वायरस है, इसलिए क्लिनिकल ट्रायल में असर दिखाने वाली दवाओं के वैकल्पिक इस्तेमाल की अनुमति दी गई है। एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिविर और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के अलावा फेपिराविर, डेक्सामेथासोन जैसी कई दवाओं का चिकित्सकीय निगरानी में इस्तेमाल हो रहा है। वहीं, कई दवाओं का परीक्षण और शोध भी हो रहे हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोरोना की दवाओं का ट्रायल
- दुनिया भर में अबतक 150 से ज्यादा अलग-अलग दवाओं को लेकर रिसर्च हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर दवाएं पहले से उपलब्ध हैं और इन्हें कोविड-19 संक्रमितों के इलाज में आजमाकर देखा गया है। दुनिया का सबसे बड़ा क्लिनिकल ट्रायल ब्रिटेन में चल रहा है, जिसे रिकवरी ट्रायल कहा जा रहा है। इस ट्रायल में अबतक 12 हजार से ज्यादा मरीजों को शामिल किया जा चुका है। कोविड में डेक्सामेथासोन समेत कौन सी दवाएं कारगर हैं और कौन सी नहीं, इसका पता लगाया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सबसे कारगर इलाज के मूल्यांकन के लिए एक सॉलिडैरिटी ट्रायल चला रहा है। इसके अलावा दुनियाभर की कई फर्मास्युटिकल्स कंपनियां भी अपनी-अपनी दवाओं का ट्रायल कर रही हैं।
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रेमडेसिविर दवा
- फोटो : social media
रेमडेसिवीर
- अमेरिका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) द्वारा वित्त पोषित एक अध्ययन में बताया गया है कि एंटीवायरल ड्रग रेमडेसिविर कोरोना मरीजों के उपचार में काफी मदद की है। अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में यह दवा देने से खासकर ऑक्सीजन सपोर्ट वाले मरीजों को काफी राहत मिल रही है। ब्रिटेन में हुए रिकवरी ट्रायल और विश्व स्वास्थ्य संगठन समर्थित सॉलिडैरिटी ट्रायल में रेमडेसिविर प्रभावी साबित हुई है। ये दवा वायरस के जीनोम पर असर करती है जिससे उसके बढ़ने की क्षमता पर असर पड़ता है।
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रेमडेसिविर
- फोटो : Hetero website
- बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रेमडेसिविर पर दुनिया के कई देशों में क्लीनिकल ट्रायल हुए, जिनमें पाया गया कि इस दवा के इस्तेमाल से रोगियों के ठीक होने का समय 15 दिन से घटकर 11 दिन हो जाता है। अमेरिकी संस्था नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शस डिजीजेस (NIAID) ने कई देशों के अस्पतालों मे भर्ती 1,063 लोगों पर इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल किया था। NIAID के प्रमुख एंथनी फाउची ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि रेमडेसिविर से कोरोना मरीजों में सुधार का समय कम हुआ है। उन्होंने कहा कि नतीजों से ये सिद्ध हो गया कि कोई दवा इस वायरस को रोक सकती है।