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Digital Detox: महाराष्ट्र के एक गांव ने की 'सेहतमंद पहल', इस प्रयास से आप भी पा सकते हैं संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 25 Sep 2022 05:16 PM IST
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Maharashtra village practicing digital detox, reducing screen time helps in mental and physical health
डिजिटल डिटॉक्स को लेकर महाराष्ट्र के गांव की पहल - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में तेजी से बढ़ती नींद विकारों की समस्या के लिए अध्ययनकर्ताओं ने स्क्रीन टाइम बढ़ने को प्रमुख कारक माना है। मोबाइल-लैपटॉप जैसे स्क्रीन्स से निकलने वाली नीली रोशनी को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए हानिकारक माना गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड-19 महामारी के बाद से लोगों को स्क्रीन टाइम काफी बढ़ा हुआ देखा गया है, जिसके कई प्रकार के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इससे होने वाले खतरों से बचे रहने के लिए  सभी आयु के लोगों को इसे कम करने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। 



इसी दिशा में महाराष्ट्र के सांगली जिले के एक गांव के लोगों ने हर शाम "डिजिटल डिटॉक्स" करने का फैसला किया है। शाम के बाद इस गांव के लोग कुछ घंटे के लिए पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूर रहते हैं। मोबाइल और अन्य प्रकार के स्क्रीन्स के कारण बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की पहल की गई है।

मोबाइल और इंटरनेट पर बर्बाद होने वाले इस समय को अन्य काम और पढ़ाई आदि में लगाया जा रहा है, साथ ही कुछ घंटे के इस डिजिटल डिटॉक्स से सेहत को भी बेहतर करने की कोशिश है। आइए जानते हैं कि आखिर ये डिजिटल डिटॉक्स क्या है और इसके क्या लाभ हैं?

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Maharashtra village practicing digital detox, reducing screen time helps in mental and physical health
स्क्रीन टाइम कम करने के लिए पहल - फोटो : pixabay

डिजिटल डिटॉक्स के बारे में जानिए?

डिजिटल डिटॉक्स का मतलब कुछ समय के लिए सभी प्रकार के स्क्रीन्स से दूरी बना लेना है। सांगली जिले के वडगांव के लोगों ने यह खास पहल की है। गांव के एक मंदिर से शाम 7 बजे एक सायरन बजता है, जो लोगों को अपने मोबाइल फोन और अन्य गैजेट्स, टेलीविजन सेट आदि को बंद करने का संकेत देता है। इस समय को लोग किताबें पढ़ने और एक दूसरे के साथ बात करने-समय बिताने के लिए प्रयोग में लाते हैं। दूसरा अलार्म 8.30 बजे बजता है जो डिजिटल डिटॉक्स अवधि की समाप्ति का संकेत होता है।

अध्ययनों में पाया गया है कि स्क्रीन से दूरी बनाने से कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस तरह के प्रयास को स्वास्थ्य विशेषज्ञ कितना फायदेमंद मानते हैं?

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मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल से मोटापे का खतरा - फोटो : Pixels

शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार

यूके स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सफोल्क के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में पाया कि स्क्रीन टाइम को कम करके कई प्रकार से अपने शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि मोबाइल पर अधिक समय बिताने के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हो गई है जिसके कारण मोटापे का खतरा बढ़ता जा रहा है।

मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोगों के लिए प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन टाइम कम होने से बढ़ रही कई तरह की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य समस्याओं के खतरे को भी कम करने में भी लाभ मिल सकता है।

Maharashtra village practicing digital detox, reducing screen time helps in mental and physical health
स्क्रीन टाइम और तनाव की बढ़ती समस्या - फोटो : istock

मानसिक स्वास्थ्य में लाभ

फोन-टीवी और लैपटॉप आदि से दूरी बनाने की आदत को मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना गया है।  स्क्रीन टाइम बढ़ने से चिंता-तनाव और अवसाद की समस्या का खतरा भी बढ़ा हुआ देखा गया है। इसके अलावा इसका एक दुष्प्रभाव यह भी है कि ऐसे लोगों की सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी भी कम हो जाती है जिसके कारण भी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है।

बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़ने को उनमें व्यवहार संबंधी समस्याओं का खतरा माना जाता है। डिजिटल डिटॉक्स जैसी पहल को स्वास्थ्य विशेषज्ञ बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।

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मोबाइल की नीली रोशनी हो सकती है हानिकारक - फोटो : istock

नींद की गुणवत्ता में होता है सुधार

स्क्रीन टाइम का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव लोगों के स्लीप शेड्यूल में गड़बड़ी के तौर पर देखा गया है। विशेषज्ञ कहते हैं सोने से कम से कम एक घंटे पहले अपने फोन को दूर रख दें,  यह मस्तिष्क को आराम देने का तरीक है, इससे नींद विकारों को भी कम किया जा सकता है।

स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी स्लीप शेड्यूल को नुकसान पहुंचाती है। इस नीली रोशनी के कारण मस्तिष्क में हार्मोन्स के असंतुलन और इससे संबंधित विकारों का भी खतरा हो सकता है। डिजिटल डिटॉक्स से नींद की गुणवत्ता सुधरती है और यह कई प्रकार की अन्य संबंधित समस्याओं को कम करने में भी आपके लिए सहायक है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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