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Monsoon Diet Tips: बारिश के मौसम में इन दालों से बना लें दूरी, वरना बढ़ सकती है पेट की परेशानी
Tue, 14 Jul 2026 12:52 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Tue, 14 Jul 2026 12:52 PM IST
सार
Health Tips: मांनसून का मौसम चल रहा है। ऐसे में आपको खाने-पीने का खास ध्यान रखना है। यहां हम आपको बताएंगे कि इस मौसम में कौन सी दाल नहीं खानी चाहिए।
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बारिश के मौसम में बिल्कुल नहीं खानी चाहिए ये दालें
- फोटो : AI
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Health Tips: मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इस दौरान खान-पान को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में नमी बढ़ने के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनप सकते हैं, जिसका असर पाचन तंत्र पर पड़ता है।
बारिश के मौसम में बिल्कुल नहीं खानी चाहिए ये दालें
- फोटो : Adobe stock
1. उड़द दाल
उड़द दाल को पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है, लेकिन यह शरीर में भारी मानी जाने वाली दालों में शामिल है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई लोगों का पाचन तंत्र सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में उड़द दाल का ज्यादा सेवन करने से पेट में गैस, अपच, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर इसका सेवन कर रहे हैं तो इसे अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर खाएं। इसमें हींग, जीरा, अदरक जैसे मसालों का इस्तेमाल करने से पाचन में मदद मिल सकती है।
उड़द दाल को पौष्टिक और प्रोटीन से भरपूर माना जाता है, लेकिन यह शरीर में भारी मानी जाने वाली दालों में शामिल है। बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने के कारण कई लोगों का पाचन तंत्र सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा कमजोर हो जाता है। ऐसे में उड़द दाल का ज्यादा सेवन करने से पेट में गैस, अपच, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर इसका सेवन कर रहे हैं तो इसे अच्छी तरह भिगोकर और पकाकर खाएं। इसमें हींग, जीरा, अदरक जैसे मसालों का इस्तेमाल करने से पाचन में मदद मिल सकती है।
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2. चना दाल
चना दाल प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर यह कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। बारिश के मौसम में पाचन क्रिया धीमी होने के कारण चना दाल को पचाने में समय लग सकता है। इसका अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना, कब्ज और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस या आंतों से जुड़ी समस्या रहती है, उन्हें चना दाल खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
चना दाल को खाने से पहले कुछ घंटों के लिए भिगोना और फिर अच्छी तरह पकाना बेहतर होता है। इसे हल्के मसालों के साथ बनाकर खाने से पाचन संबंधी परेशानी कम हो सकती है।
चना दाल प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर यह कुछ लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। बारिश के मौसम में पाचन क्रिया धीमी होने के कारण चना दाल को पचाने में समय लग सकता है। इसका अधिक सेवन करने से गैस, पेट फूलना, कब्ज और पेट में भारीपन महसूस हो सकता है। जिन लोगों को पहले से गैस या आंतों से जुड़ी समस्या रहती है, उन्हें चना दाल खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
चना दाल को खाने से पहले कुछ घंटों के लिए भिगोना और फिर अच्छी तरह पकाना बेहतर होता है। इसे हल्के मसालों के साथ बनाकर खाने से पाचन संबंधी परेशानी कम हो सकती है।
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बारिश के मौसम में बिल्कुल नहीं खानी चाहिए ये दालें
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3. राजमा दाल
राजमा कई लोगों की पसंदीदा डिश है और इसमें प्रोटीन, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, इसे पचने में समय लगता है। मानसून के दौरान जब पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है, तब राजमा खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट दर्द, अपच और ब्लोटिंग की शिकायत हो सकती है।
राजमा को कभी भी जल्दी-जल्दी या अधपका नहीं खाना चाहिए। इसे कम से कम कई घंटों तक पानी में भिगोने के बाद अच्छी तरह पकाना जरूरी है। अधपके राजमा में मौजूद कुछ तत्व पेट की परेशानी बढ़ा सकते हैं।
राजमा कई लोगों की पसंदीदा डिश है और इसमें प्रोटीन, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हालांकि, इसे पचने में समय लगता है। मानसून के दौरान जब पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है, तब राजमा खाने से कुछ लोगों को गैस, पेट दर्द, अपच और ब्लोटिंग की शिकायत हो सकती है।
राजमा को कभी भी जल्दी-जल्दी या अधपका नहीं खाना चाहिए। इसे कम से कम कई घंटों तक पानी में भिगोने के बाद अच्छी तरह पकाना जरूरी है। अधपके राजमा में मौजूद कुछ तत्व पेट की परेशानी बढ़ा सकते हैं।
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4. छोले
छोले प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें भी भारी भोजन माना जाता है। मानसून में ज्यादा मात्रा में छोले खाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
खासकर जिन लोगों को पेट में जलन या गैस की समस्या रहती है, उन्हें बारिश के दिनों में छोले कम मात्रा में खाने चाहिए। छोले बनाने से पहले उन्हें अच्छी तरह भिगोना और पूरी तरह गलाकर पकाना जरूरी है।
छोले प्रोटीन, फाइबर और कई पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इन्हें भी भारी भोजन माना जाता है। मानसून में ज्यादा मात्रा में छोले खाने से पाचन तंत्र पर दबाव पड़ सकता है। इससे गैस, पेट फूलना, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
खासकर जिन लोगों को पेट में जलन या गैस की समस्या रहती है, उन्हें बारिश के दिनों में छोले कम मात्रा में खाने चाहिए। छोले बनाने से पहले उन्हें अच्छी तरह भिगोना और पूरी तरह गलाकर पकाना जरूरी है।