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Tuberculosis: क्या 2025 तक मिल पाएगी टीबी से मुक्ति? विशेषज्ञों ने इस बढ़ते खतरे को लेकर किया सावधान

Sat, 07 Sep 2024 06:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 07 Sep 2024 06:37 PM IST
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plan to end tuberculosis by 2025 study says Healthcare workers at higher risk of Tuberculosis
भारत में टीबी का खतरा - फोटो : istock

भारत साल 2025 तक तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। पर क्या ये वास्तव में आसान है? क्योंकि हाल के वर्षों के आंकड़े कुछ अलग ही कहानी बयां करते हैं। वैश्विक स्तर पर, अनुमानित 10 मिलियन (एक करोड़) लोग टीबी से पीड़ित होते हैं और हर साल दस लाख से ज्यादा मौतें होती हैं।



वहीं भारत की बात करें तो यहां सामने आने वाले मामले अब भी वैश्विक टीबी का लगभग 25% हिस्सा है। साल 2022 में टीबी के करीब 2.77 मिलियन (27 लाख) केस रिपोर्ट किए गए थे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर व्यावसायिक जोखिमों को रेखांकित करते हुए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भारत में सामान्य आबादी की तुलना में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच टीबी के मामले बहुत अधिक हैं। साल 2004 से 2023 के बीच किए गए 10 अलग-अलग अध्ययनों के विश्लेषण से पता चला है कि भारत में प्रति एक लाख स्वास्थ्य कर्मियों पर औसतन 2,391.6 मामले हैं। टीबी कई तरह से स्वास्थ्य के लिए गंभीर माना जाता है जिससे बचाव के उपाय करते रहना बहुत जरूरी है।

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भारत में टीबी के केस - फोटो : istock

भारत में बढ़ते टीबी के मामले

तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद और सफदरजंग जैसे अस्पतालों के डॉक्टर्स की टीम द्वारा संयुक्त रूप से किए गए इस अध्ययन को "भारत में स्वास्थ्य सेवा कर्मियों में टीबी की व्यापकता" शीर्षक से प्रकाशित किया गया है।

इसमें कहा गया है कि टीबी वैश्विक स्तर पर सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। भारत जैसे उच्च स्थानिक दर वाले देशों में इसका जोखिम और भी अधिक देखा जा रहा है जो अकेले वैश्विक टीबी बोझ का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है।

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टीबी का जोखिम - फोटो : istock

टीबी का संक्रमण

टीबी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होने वाला यह संक्रामक रोग है। ये मुख्य रूप से वायुजनित ड्रॉपलेट्स के माध्यम से फैलता है। टीबी रोग वाले लोगों की खांसी या छींक से निकलने वाले बूंदों के माध्यम से आसपास के अन्य लोगों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के बीच टीबी की घटनाओं को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जाहिर की है। 

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स्वास्थ्य कर्मियों में बढ़ते टीबी के केस - फोटो : istock

अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययनों से संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य सेवा कर्मियों में टीबी के मामलों की दर सामान्य आबादी की तुलना में तीन गुना अधिक है। सफदरजंग अस्पताल में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के निदेशक और प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने बताया कि भारत में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच टीबी पर व्यापक दर काफी चिंताजनक है।

साल 2004 से 2023 के बीच दस अध्ययनों की समीक्षा की गई। इसमें प्रयोगशाला तकनीशियनों (प्रति 100,000 में 6,468.31 मामले), डॉक्टरों (प्रति 100,000 में 2,006.18) और नर्सों (प्रति 100,000 में 2,726.83) के बीच विशेष रूप से टीबी की उच्च दर का पता चलता है। 

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टीबी की रोकथाम - फोटो : istock

'टीबी की रोकथाम जरूरी

डॉ. किशोर कहते हैं, यह डेटा महत्वपूर्ण व्यावसायिक खतरों की ओर इशारा करता है, जिन्हें अक्सर स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अनदेखा कर दिया जाता है। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि अपर्याप्त वेंटिलेशन और स्वास्थ्य केंद्रों में खराब वायु परिसंचरण इसका प्रमुख कारण हो सकता है।

उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों, खास तौर पर उच्च जोखिम वाले कर्मियों के लिए नियमित टीबी जांच पर जोर दिया, ताकि शुरुआती हस्तक्षेप से संक्रमण का पता चल सके। इसके अलावा, टीबी के जोखिमों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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