मेडिकल रिपोर्ट्स से स्पष्ट होता है कि कई बीमारियां शरीर में लंबे समय से बनी होती हैं, पर अक्सर कोई बड़ा संकेत नहीं देती हैं। लक्षण स्पष्ट न होने से इसका पता नहीं चल पाता और बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जाती है। इसकी पहचान तक हो पाती है जब ये काफी फैल चुकी हो और गंभीर रूप ले ले। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहने की सलाह देते हैं।
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Prostate Cancer Se Kaise Bache: प्रोस्टेट कैंसर दुनियाभर में पुरुषों में पाए जाने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। अच्छी बात यह है कि अगर इसे शुरुआती चरण में पकड़ लिया जाए तो इलाज की सफलता दर काफी बेहतर हो सकती है। प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट की मदद से इस खतरे का बहुत पहले ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट क्या है?
प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) टेस्ट एक साधारण ब्लड टेस्ट है, जो प्रोस्टेट ग्रंथि में हो रहे बदलावों को पहचानने में मदद करता है। डॉक्टर कहते हैं वैसे तो केवल हाई पीएसए की रिपोर्ट कैंसर की पुष्टि नहीं करती, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर माना जाता है, जिसके आधार पर आगे की जांच की जाती है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से प्रोस्टेट की जांच करानी चाहिए।
- जिनके परिवार में पहले से किसी को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो, उनमें जोखिम और भी अधिक हो सकता है।
- प्रोस्टेटे कैंसर के लक्षणों पर ध्यान देते रहना और समय रहते जांच की मदद से आप इस जानलेवा बीमारी के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।
पीएसए टेस्ट से क्या पता चलता है?
पीएसए टेस्ट में प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन की जांच की जाती है। ये एक प्रकार का प्रोटीन है जो प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा बनाता है। सामान्य परिस्थितियों में इसकी थोड़ी मात्रा खून में मौजूद रहती है। जब प्रोस्टेट ग्रंथि में कोई असामान्य बदलाव होता है तब इस प्रोटीन का स्तर बढ़ने लगता है।
- डॉक्टर इस रिपोर्ट को मरीज की उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जांचों के साथ मिलाकर देखते हैं। कई बार कैंसर न होने पर भी पीएसए बढ़ सकता है और कुछ मामलों में कैंसर होने के बावजूद पीएसए हाई नहीं होता है।
- जिन मरीजों में इस बीमारी की हिस्ट्री रही है और पीएसए हाई है उनमें कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी और अन्य जांच भी किए जाते हैं।
किन लोगों के लिए ये जांच जरूरी?
विशेषज्ञों के अनुसार सभी पुरुषों को डॉक्टर की सलाह पर 50 की उम्र के बाद ये जांच जरूर कराना चाहिए। जिन लोगों के परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास हो, उन्हें 45 वर्ष या उससे पहले भी डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
यदि आपके पिता, भाई या अन्य करीबी रिश्तेदार को प्रोस्टेट कैंसर रहा हो तो समय रहते स्क्रीनिंग बहुत जरूरी हो जाती है।
प्रोस्टेट कैंसर के क्या लक्षण होते हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित जांच के साथ सभी पुरुषों को कम उम्र से ही प्रोस्टेट की समस्याओं के लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। कुछ लक्षण भी संकेत देते हैं कि आपको जांच की जरूरत है। वैसे तो ये लक्षण केवल कैंसर के नहीं होते और कई अन्य प्रोस्टेट समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं।
- बार-बार पेशाब आना
- रात में कई बार पेशाब के लिए उठना
- पेशाब शुरू करने में कठिनाई
- पेशाब की धार कमजोर होना।
- पेशाब या वीर्य में खून आना।
- पेल्विक हिस्से में अक्सर दर्द होते रहना।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।