मोटे लोगों को मोटा या आलसी कहना बंद करना होगा क्योंकि ये कलंक महामारी की तरह फैल रही बीमारी से लड़ने में बाधक है। किंग्स कॉलेज लंदन का मोटापे पर शोध हाल ही नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोध में दुनियाभर के 100 से अधिक चिकित्सकों ने इसे सही माना है कि मोटे या अधिक वजन वाले लोगों को मोटा या आलसी कहने से उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान होता है।
13.5 करोड़ लोग भारत में मोटापे के शिकार, मजाक उड़ाने के कारण इस बीमारी से नहीं उबर पाते
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किंग्स कॉलेज लंदन के प्रो. फ्रांसेस्को रूबीनों का कहना है कि दुनियाभर के लोगों को अब ये शपथ लेनी होगी कि उन्होंने ‘मोटापे के कलंक’ को मिटाने के लिए क्या किया। वे बताते हैं कि मोटापा दुनिया की समस्या है पर हम सामाजिक और मानवाधिकारों को नजरअंदाज करते हैं। मोटे लोगों को मोटा या आलसी कहने से ऐसे लोगों में इस रोग से लड़ने की क्षमता घटती है। चिकित्सकों का मानना है कि मोटे लोगों से ऐसा भेदभाव या उन्हें मानसिाक प्रताड़ना देना कुछ वैसा ही है जैसे पहले उन लोगों को प्लेग, कॉलरा और एचआईवी का रोगी बताया जाता था जिन्हें ये तकलीफ होती ही नहीं थी।
मोटापे के लिए सिर्फ लोग दोषी नहीं
वैज्ञानिकों ने ये भी स्पष्ट किया है कि मोटापे के लिए सिर्फ लोग दोषी नहीं हैं। इसके लिए जैविक, आनुवांशिक और पर्यावरण भी बड़ा कारण है। ऐसे में समाज के दूसरे लोगों को मोटे या अधिक वजन वाले लोगों से सामान्य व्यवहार करना चाहिए। दूसरे लोगों को ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। इस बात का ध्यान रखें कि कोई उनका मजाक न उड़ाए।
दुनिया में हर पांच में एक व्यक्ति मोटा
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचर्ड पाइल का कहना है कि ‘मैं उस समय की कल्पना भी नहीं कर सकता जब मोटापे को बीमारी की संज्ञा दी जाएगी।’ मुझे इस बात का डर है कि अगर ऐसा होता है तो मरीजों से ध्यान भटक जाएगा और दवाईयों और सर्जरी तकनीक की बाढ़ जाएगी। मोटापा दुनिया के लिए समस्या है। एक अनुमान के मुताबिक 2045 तक दुनिया का हर पांच में से एक आदमी मोटो की समस्या से ग्रसित होगा।
मोटापा से बीमारियां, जीवन की गुणवत्ता खराब
मोटापा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है लेकिन आने वाले समय में ये कई तरह की घातक बीमारियों का कारण बनेगा। इसमें टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, स्तन और बाउल कैंसर के साथ स्ट्रोक के मामले बढ़ेंगे। मोटापा जीवन की गुणवत्ता को खराब करने के साथ मानसिक समस्याओं का कारण बनेगा। व्यक्ति खुद से हताश रहेगा और अवसाद में जीवन जीने को मजबूर होगा।