कैंसर दुनियाभर की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तेजी से बढ़ता सबसे गंभीर संकट है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनता है। आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में हर साल कैंसर से करीब 96 लाख से एक करोड़ मौतें दर्ज की गई हैं।
Health Alert: दूसरों की गलती से भी आपको हो सकता है कैंसर? कहीं दोस्त ही न बन जाएं सेहत के लिए दुश्मन
लंग्स कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 10-20% लंग्स कैंसर के मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। रिसर्च बताती है कि महिलाओं और एशियाई देशों में यह दर अधिक देखी गई है।
धूम्रपान न करने वालों में लंग्स कैंसर
लंग्स कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। आमतौर पर माना जाता रहा है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को होता है, हालांकि ये खतरा उन लोगों में भी बढ़ रहा है जिन्होंने कभी सिगरेट पी ही नहीं।
- फेफड़ों के कैंसर के कई मामलों में देखा गया है कि लोगों की लाइफस्टाइल तो ठीक है, वो धूम्रपान भी नहीं करते फिर भी उनमें कैंसर हो गया।
- इसका मतलब है कि आप दूसरों की गलतियों की वजह से भी इस घातक कैंसर की चपेट में आ सकते हैं।
- दुनियाभर में बड़ी संख्या में नॉन-स्मोकर्स यानी जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी, उनमें भी लंग्स कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। ये दूसरे के सिगरेट से होने वाले धुएं के संपर्क में आने की वजह से हो सकता है।
कैंसर का बढ़ता जोखिम
डॉक्टर कहते हैं, जब फेफड़ों की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, तो कैंसर हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है।
- सिगरेट के धुएं में 70 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले रसायन पाए जाते हैं, जो कैंसर को बढ़ा सकते हैं।
- हालांकि सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, सेकेंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं में रहने से भी आपमें इस कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
- सेकेंड हैंड स्मोकिंग के अलावा वायु प्रदूषण भी एक बड़ा खतरा है। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों में जाकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
नॉन-स्मोकर्स में भी फेफड़ों का कैंसर
नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने वैश्विक स्वास्थ्य नीति और शहरी नियोजन की अपील की है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो और नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट (एनसीआई) द्वारा किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि नॉन-स्मोकर्स में भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। इसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट करना जरूरी है।
- आप धूम्रपान नहीं करते हैं पर यदि आपमें कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है तो भी लंग्स कैंसर को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
- ऐसे स्थानों पर रहते हैं जहां वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बना रहता है या फिर ऐसे कार्यों से जुड़े हैं जहां रसायनों के अक्सर संपर्क में अधिक रहते हैं उनमें भी लंग्स कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है।
फेफड़ों के कैंसर की पहचान क्या है?
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण आमतौर पर सांस की समस्याओं जैसे होते हैं। हालांकि बीमारी बढ़ने के साथ आपको कई और दिक्कतें हो सकती हैं।
- ऐसी खांसी जो ठीक न हो रही हो या समय के साथ और बिगड़ जाए।
- खांसी के साथ खून आना या गाढ़े रंग का बलगम आना।
- सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, घरघराहट या सांस लेते समय आवाज आना।
- लगातार सीने में दर्द बने रहना जो अक्सर गहरी सांस लेने, हंसने या खांसने पर और बढ़ जाता है।
- बिना किसी वजह के वजन कम होना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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