देश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों मौसमी बुखार का खतरा देखा जा रहा है। कई हिस्सों से स्वाइन फ्लू (एच1एन1) संक्रमण के बढ़ने की भी खबर है। इस बीच मशूहर अभिनेत्री शबाना आजमी भी स्वाइन फ्लू का शिकार हो गई हैं। हाल ही में वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। बीमारी का पता चलने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी है।
Swine Flu: क्या जानलेवा हो सकता है स्वाइन फ्लू का संक्रमण? शबाना आजमी हो गई हैं शिकार
स्वाइन फ्लू का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं। हाल ही में फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी को स्वाइन फ्लू का शिकार पाया गया है। वह दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान भी शामिल हुई थीं।
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स्वाइन फ्लू के खतरों को जानिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू का सबसे बड़ा खतरा यह है कि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू से काफी मिलते-जुलते हैं।
- इसमें भी बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर दर्द और थकान जैसे लक्षण होते हैं जिसे अक्सर लोग इग्नोर कर देते हैं।
- हालांकि कुछ स्थितियों में संक्रमण गंभीर समस्याओं का कारण बना सकती है।
- बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों में गंभीर मामलों का खतरा अधिक होता है।
- आमतौर पर स्वाइन फ्लू को जानलेवा नहीं माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाइन फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं है, बस समय पर पहचान और सावधानी का ध्यान रखें। संक्रमित व्यक्ति से दूरी, हाथों की सफाई, मास्क का उपयोग और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू, इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। इसे मौसमी फ्लू का हिस्सा माना जाता है। अधिकांश मरीज घर पर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर संक्रमण विकसित हो सकता है।
- संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स से दूसरों को खतरा हो सकता है।
- इसके अलावा संक्रमित सतह छूने के बाद अगर आप आंख, नाक या मुंह छूते हैं तो इससे भी संक्रमण हो सकता है।
स्वाइन फ्लू के जोखिमों के बारे में जान लीजिए
डॉक्टर कहते हैं, स्वाइन फ्लू के कारण तेज बुखार, सूखी खांसी, गले में दर्द, नाक बहने, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द जैसी दिक्कतें देखी जाती हैं।
- कुछ मरीजों में उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं।
- कई लोगों में ये सांस फूलने जैसी दिक्कतें पैदा कर सकता है जिसे गंभीर संकेत माना जाता है।
समय पर इलाज न मिलने पर निमोनिया, फेफड़ों में संक्रमण होने का जोखिम रहता है जिससे मरीजों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है। इस खतरे को कम करने के लिए डॉक्टर सभी लोगों को फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह देते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।