शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करना है, उतना ही जरूरी है रोजाना रात में अच्छी और निर्बाध नींद प्राप्त करना। नींद की कमी आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है। कई अध्ययनों से पता चलता है जिन लोगों की नींद अनियमित होती है या नींद पूरी नहीं होती है उनमें अन्य लोगों की तुलना में हृदय रोग, इंफ्लेमेशन और कई अन्य प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है।
Alert: नींद की कमी शरीर को बना देती है बीमारियों का घर, 170 से अधिक रोगों का हो सकता है खतरा
- चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी और आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 88 हजार से ज्यादा लोगों की नींद से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि नींद की कमी से 172 से अधिक बीमारियों का खतरा हो सकता है।
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संपूर्ण स्वास्थ्य पर देखा जाता है असर
शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में देर से सोने वालों में लिवर सिरोसिस का खतरा अधिक हो सकता है। जो लोग रात 12:30 बजे बाद सोते हैं उनमें लिवर सिरोसिस होने का खतरा उन लोगों से 2.6 गुना ज्यादा था, जो रात 11:30 बजे से पहले सो जाते हैं। इसके अलावा खराब नींद या कम नींद लेने का मस्तिष्क और दिल की सेहत पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
हृदय रोग और मस्तिष्क की समस्याओं का जोखिम
अध्ययनों से पता चलता है कि अनिद्रा और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियों सहित नींद की गड़बड़ी, हृदय रोग के जोखिमों को बढ़ा देती है।
खराब नींद उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों को बढ़ा सकती है, साथ ही इससे सूजन की समस्या भी बढ़ जाती है जिसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार, अनियमित नींद से हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
इसी तरह नींद की कमी याददाश्त, निर्णय क्षमता और ध्यान को प्रभावित करती है। दीर्घकालिक स्थितियों में इससे अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है।
ये भी जानिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अच्छी नींद लेना सभी उम्र के लोगों के लिए जरूरी है। ये शारीरिक-मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को प्रभावित करती है। इससे होने वाले कुछ और दुष्प्रभावों को भी जानिए।
- नींद की अनियमितता शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ाती है और मेलाटोनिन (नींद के लिए जरूरी हार्मोन) को गड़बड़ कर देती है।
- अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की कमी से शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर हो जाता है।
- नींद की कमी से ग्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ता है और लेप्टिन (भूख कम करने वाला हार्मोन) घटता है। इससे आप अधिक खाने लगते हैं जिससे वजन बढ़ सकता है।
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स्रोत
Phenome-wide Analysis of Diseases in Relation to Objectively Measured Sleep Traits and Comparison with Subjective Sleep Traits in 88,461 Adults
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।