शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा जरूरी है। विटामिन-डी भी इन्हीं पोषक तत्वों में से एक है। हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के सामान्य कामकाज और इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका होती है। हालांकि जितना ये विटामिन सेहत के लिए जरूरी है, शरीर के लिए इसकी अधिकता उतनी ही नुकसानदायक भी हो सकती है।
सेहत की बात: विटामिन-डी की गोलियां खाते हैं तो जान लें ओवरडोज के ये नुकसान, आप भी न हो जाएं शिकार?
विटामिन-डी हड्डियों, मांसपेशियों और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए जरूरी है, लेकिन सप्लीमेंट्स का लंबे समय तक सेवन से टॉक्सिसिटी हो सकती है। इससे खून में कैल्शियम बढ़ने, किडनी की दिक्कत होने, उल्टी, कमजोरी और मानसिक भ्रम जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विटामिन-डी की अधिकता से क्या होता है?
विटामिन-डी टॉक्सिसिटी आमतौर पर सप्लीमेंट्स की बहुत अधिक मात्रा लंबे समय तक लेने से होती है। भोजन या धूप से सामान्य परिस्थितियों में इसकी अधिकता नहीं होती है। इसका जोखिम कुछ प्रकार की बीमारियों के शिकार या फिर उन लोगों में देखा जाता है जो बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स लेते रहते हैं।
- शरीर में विटामिन-डी जरूरत से ज्यादा होने पर खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थिति को हाइपरकैल्सेमिया कहते हैं।
- इससे मतली, उल्टी, ज्यादा प्यास लगने, कमजोरी और बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किडनी और पाचन पर पड़ता है असर
- खून में कैल्शियम का स्तर बढ़ने से किडनी पर दबाव पड़ सकता है। गंभीर मामलों में किडनी में पथरी बनने या उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए लंबे समय तक विटामिन-डी सप्लीमेंट लेने वाले लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
- इसी तरह विटामिन-डी की अधिकता से होने वाले हाइपरकैल्सेमिया के कारण पेट से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसके कारण कुछ लोगों को मतली, उल्टी, कब्ज या भूख कम लगने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
मानसिक स्थिति पर असर
खून में कैल्शियम का स्तर बहुत बढ़ जाने पर तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित हो सकते है। इसके कारण सिरदर्द, कमजोरी, भ्रम, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। बेहद गंभीर मामलों में चेतना का स्तर कम होने जैसी जटिलताएं भी देखी गई हैं।
विटामिन-डी लेते समय किन बातों का रखें ध्यान?
स्वस्थ वयस्क के लिए रोजाना लगभग 400–800 IU (10-20 माइक्रोग्राम विटामिन-डी काफी है। अगर आप नियमित रूप से इससे अधिक मात्रा में विटामिन-डी ले रहे हैं तो शरीर को कई प्रकार के नुकसान का खतरा हो सकता है। आपके लिए कितनी मात्रा में विटामिन-डी जरूरी है ये आपकी उम्र, स्वास्थ्य और शरीर में इसकी मौजूदा स्थिति पर निर्भर करती है।
डॉक्टर की सलाह के बिना हाई-डोज सप्लीमेंट लेन से बचना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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