इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही है, भारत भी इससे काफी प्रभावित है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में ये एक 'साइलेंट एपिडेमिक' की तरह बढ़ती जा रही है। अनुमानित तौर पर भारत में हर 4 में से 1 वयस्क इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार है।
Insulin Resistance: इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे ठीक करें? डायटीशियन ने बताए इसके सबसे असरदार तरीके
इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल ब्लड शुगर की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थिति है। आइए जान लेते हैं कि इससे क्या दिक्कतें होती हैं और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे सुधारा जा सकता है?
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इंसुलिन रेजिस्टेंस और इसके कारण होने वाली समस्याएं
इंसुलिन रेजिस्टेंस को आमतौर पर हम केवल ब्लड शुगर की समस्या मानते रहते हैं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमारे पूरे मेटाबॉलिक सिस्टम को प्रभावित करने वाली स्थिति हो सकती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार लोगों को लगातार थकान, पेट की चर्बी बढ़ने, मीठा खाने की ज्यादा इच्छा होना और वजन से संबंधित समस्याएं होने लगती हैं।
डायटीशियन नमृता सिंह कहती हैं, सही खानपान, नियमित व्यायाम, बेहतर नींद और वजन को कंट्रोल करने जैसे उपाय इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि ऐसे लोगों को क्या उपाय करते रहना चाहिए?
हरे पत्तेदार सब्जियां जरूर खाएं
पत्तेदार हरी सब्जियां इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करने में अत्यधिक प्रभावी मानी जाती हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट कम होता है, जबकि ये फाइबर और मैग्नीशियम से भरपूर होती हैं, जो इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
- पालक मैग्नीशियम से भरपूर होता है जो ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करता है और इंसुलिन सिग्नलिंग को बेहतर बनाता है।
- इसी तरह मेथी के पत्तों में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो शुगर के अवशोषण की गति को काफी धीमा कर देता है।
फाइबर और प्रोटीन वाली युक्त चीजें ज्यादा खाएं
घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर के अवशोषण को धीमा करता है और इंसुलिन की जरूरतों को कम कर सकता है। ओट्स, दालें, बीन्स, चिया सीड्स, फल और सब्जियां इसके अच्छे स्रोत हैं।
- इसके अलावा फाइबर वाली चीजें पेट को लंबे समय तक भरा रखने में भी सहायक हैं, जिससे ओवरईटिंग कम होती है और वजन को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।
- इसी तरह प्रोटीन वाली चीजें भूख को नियंत्रित करने और मांसपेशियों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती हैं। स्वस्थ मांसपेशियां ग्लूकोज के बेहतर उपयोग में सहायक मानी जाती हैं।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट कम खाएं
व्हाइट ब्रेड, मैदा, मीठे पेय और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ जैसी रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाती हैं। इससे इंसुलिन का स्तर भी तेजी से बढ़ सकता है। इनकी जगह साबुत अनाज, ब्राउन राइस, जौ, बाजरा और ओट्स जैसे कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प माने जाते हैं।