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Eye Tips: क्या है 'डिजिटल आई स्ट्रेन'? जानें स्क्रीन से होने वाली आंखों की समस्याओं के लिए बचाव के आसान उपाय

Wed, 25 Jun 2025 02:15 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 25 Jun 2025 02:15 PM IST
सार

आज के समय में बहुत से लोग अपनी दिनचर्या का अधिकतर समय किसी न किसी स्क्रीन के सामने ही बिताते हैं। ज्यादा देर तक स्क्रीन के सामने रहने से डिजिटल आई स्ट्रेन की समस्या हो सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं, साथ ही इसके बचाव के उपाय भी जानेंगे।

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What is Digital Eye Strain Causes Symptoms and Tips to Reduce Screen Fatigue
स्क्रिन टाइम - फोटो : Adobe Stock

Digital Eye Strain: आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट हमारी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में अधिकतर लोग इन स्क्रीन्स पर अपना ज्यादातर समय बिताने लगे हैं। पहले के समय बच्चे कम से कम आउटडोर गेम खेलते थे, लेकिन अब मनोरंजन से लेकर काम तक, हर चीज इन्हीं स्क्रीन्स पर सिमट गई है। लेकिन इस सुविधा का एक नकारात्मक पहलू भी है, लंबे समय तक स्क्रीन पर समय बिताने से हमारी आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में डिजिटल आई स्ट्रेन या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम कहा जाता है।



यह सिर्फ आंखों की हल्की थकान नहीं है, बल्कि तेजी से बढ़ती हुई बड़ी समस्या है जो आंखों में जलन, सूखापन, धुंधलापन और लगातार सिरदर्द का कारण बन सकती है। ऐसे में, इस डिजिटल चुनौती के दौर में अपनी आंखों की सेहत का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइए इस लेख में हम इसी के बारे में विस्तार से जानेंगे कि डिजिटल आई स्ट्रेन क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है?

What is Digital Eye Strain Causes Symptoms and Tips to Reduce Screen Fatigue
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

डिजिटल आई स्ट्रेन क्या है?
डिजिटल आई स्ट्रेन एक ऐसी स्थिति है, जो लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन (कंप्यूटर, फोन, टीवी) के उपयोग से होती है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट), बार-बार पलक न झपकना, और अनुचित दूरी या रोशनी में काम करना इसके मुख्य कारण हैं।

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आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com

एक रिपोर्ट के अनुसार, 50-90% लोग जो रोजाना 2-3 घंटे से ज्यादा स्क्रीन पर समय बिताते हैं, इस समस्या से प्रभावित होते हैं। इसके लक्षणों में आंखों में दर्द, सूखापन, थकान, धुंधला दिखना, और सिरदर्द शामिल हैं।


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आंख - फोटो : freepik.com

डिजिटल आई स्ट्रेन के कारण
लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने से आंखों की मांसपेशियां थक जाती हैं। स्क्रीन की नीली रोशनी रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है और स्लीप साइकिल को प्रभावित करती है। इसके अलावा कम पलक झपकने से आंखें सूखी रहती हैं, जिससे जलन और असहजता होती है। खराब रोशनी, गलत बैठने की मुद्रा, और स्क्रीन की गलत दूरी भी इस समस्या को बढ़ाते हैं।

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स्क्रीन टाइम (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
बचाव के आसान उपाय
इस समस्या से बचने के लिए आप कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं- 
  • हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए स्क्रीन से हटकर 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। यह आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है।  
  • आमतौर पर स्क्रीन देखते समय लोग कम पलक झपकाते हैं, जिससे आंखें सूखती हैं। सचेत रूप से बार-बार पलक झपकाएं।
  • स्क्रीन की ब्राइटनेस को कम करें और नीली रोशनी को कम करने वाले फिल्टर या चश्मे का उपयोग करें। 
  • स्क्रीन को आंखों से 20-24 इंच की दूरी पर और आंखों के लेवल से सिर्फ 10-15 डिग्री नीचे रखें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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