लाइफस्टाइल की गड़बड़ी ने हमारी पूरी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। आंखों की सेहत पर भी इसका गंभीर असर देखा जा रहा है। यही कारण है कि अब कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चे भी कम या धुंधला दिखाई देने के साथ आंखों की कई बीमारियों का शिकार पाए जा रहे हैं।
Eye Problems: आंखों की रोशनी चुरा सकती है ग्लूकोमा की बीमारी, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?
ग्लूकोमा के शुरुआती चरण में अधिकांश लोगों को कोई खास लक्षण महसूस ही नहीं होते। कई बार जब तक मरीज को पता चलता है, तब तक ऑप्टिक नर्व को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
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ग्लूकोमा की बढ़ती समस्या
ग्लूकोमा आंखों की गंभीर बीमारी है जिसमें आंख से मस्तिष्क तक दृश्य का संकेत पहुंचाने वाली ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है।
- ग्लूकोमा का सबसे आम कारण आंख के भीतर बनने वाले तरल का सही तरीके से बाहर न निकल पाना है।
- इससे आंख के अंदर दबाव बढ़ सकता है और ऑप्टिक नर्व पर असर पड़ता है।
- उम्र बढ़ना, परिवार में पहले से ग्लूकोमा की समस्या के अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर भी इसका खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
आमतौर पर लोगों को इस बीमारी के बारे में कम जानकारी होती है इसलिए कई बार अफवाह इसके इलाज में बाधा बन सकती है।
- ग्लूकोमा का जोखिम उम्र बढ़ने के साथ जरूर बढ़ता है, लेकिन ग्लूकोमा किसी भी उम्र में हो सकता है। नवजात शिशुओं से लेकर युवा वयस्कों तक में भी इसके कुछ प्रकार देखे जाते हैं। इसलिए केवल उम्र के आधार पर खुद को सुरक्षित मान लेना सही नहीं है।
मिथ: आंख में दर्द नहीं है, इसलिए ग्लूकोमा नहीं हो सकता
- ग्लूकोमा वर्षों तक बिना दर्द और बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकता है। इसलिए दर्द न होना बीमारी न होने का प्रमाण नहीं है। नियमित आंखों की जांच जरूरी है।
मिथ: ग्लूकोमा का ऑपरेशन होने के बाद बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है
ग्लूकोमा एक क्रॉनिक बीमारी है, सर्जरी या लेजर उपचार आंख के दबाव को नियंत्रित करने में मदद करते हैं । उपचार के बाद भी नियमित जांच और फॉलो-अप जरूरी रहते हैं। कई मरीजों को आगे भी आई ड्रॉप्स की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए इलाज के बाद डॉक्टर की सलाह का पालन करना जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।