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Heart Failure: हाल ही में मां बनी हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर, वरना हार्ट फेलियर का हो सकती हैं शिकार

Mon, 29 Jun 2026 04:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 29 Jun 2026 04:41 PM IST
सार

गर्भावस्था और प्रसव के बाद सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पैरों में सूजन या तेजी से वजन बढ़ने जैसे लक्षण सामान्य मानकर नजरअंदाज करना कई महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ये हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

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Heart Failure Occurring in the Perinatal Period how to Recognizing symptoms earlier
हृदय स्वास्थ्य को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Amarujala.com/AI

मातृत्व हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत समय माना जाता है। गर्भावस्था के दौरान महिला को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस दौरान खान-पान से लेकर आराम, दवाइयों और नियमित जांच तक हर छोटी-बड़ी बात पर ध्यान दिया जाता है। लेकिन जैसे ही बच्चे का जन्म होता है, घर का पूरा फोकस नवजात की देखभाल पर चला जाता है और अक्सर मां की सेहत पीछे छूट जाती है। यही वह सबसे बड़ी गलती है जो गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।



डॉक्टरों के अनुसार प्रसव के बाद का पहला साल महिला के शरीर के लिए रिकवरी का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोन, मांसपेशियों, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य तक में बड़े बदलाव आते हैं। डिलीवरी के बाद ये सभी बदलाव धीरे-धीरे सामान्य हो रहे होते हैं। इस दौरान शरीर को पर्याप्त पोषण, आराम और सही देखभाल न मिले तो कई तरह की समस्याएं जन्म ले सकती हैं। 

अध्ययन में पाया गया है कि प्रसव के बाद पहले साल सेहत को लेकर लापरवाही, लक्षणों पर ध्यान न देना हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के खतरे को कई गुना बढ़ाने वाला हो सकता है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock

प्रसव के बाद दिल की बीमारियों का खतरा

गर्भावस्था और प्रसव के बाद सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पैरों में सूजन या तेजी से वजन बढ़ने जैसे लक्षण सामान्य मानकर नजरअंदाज करना कई महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) का मानना है कि गर्भकाल और प्रसवोत्तर अवधि में दिल को होने वाले खतरों को अगर समय पर पहचान लिया जाए तो उपचार से अनियमित धड़कन, स्ट्रोक, समयपूर्व प्रसव और मातृ मृत्यु जैसे गंभीर जोखिमों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
 

  • विशेषज्ञों ने कहा है कि प्रसव के बाद पहले साल लगातार निगरानी और उपचार मातृ स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। 
  • जिस तरह गर्भावस्था के दौरान सावधानी जरूरी होती है, उसी तरह प्रसव के बाद का पहला साल भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।
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हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर के मामले - फोटो : Adobe stock photos

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने किया अलर्ट

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का यह बयान जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित हुआ है। इसमें गर्भावस्था और प्रसवोत्तर अवधि में हार्ट फेलियर की पहचान, जोखिम, जांच, उपचार और दीर्घकालिक देखभाल से जुड़े नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित किया गया है। 

  • विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट फेलियर के लक्षण सामान्य गर्भावस्था की समस्याओं जैसे दिखते हैं।
  • हार्ट फेलियर ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता। 


क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

मेयो क्लिनिक में कार्डियोवैस्कुलर मेडिसिन विभाग की  असिस्टेंट प्रोफेसर डेमिलाडे ए. एडेडिनसेवो कहती हैं, सभी महिलाओं को इसके लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है।
 

  • हार्ट फेलियर का असर सिर्फ दिल पर ही नहीं, बल्कि फेफड़ों, किडनी, दिमाग और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है। 
  • खून का बहाव कम होने और शरीर में फ्ल्यूड (तरल पदार्थ) जमा होने की वजह से सांस लेने में तकलीफ, किडनी की समस्या, दिल की धड़कन का अनियमित होने और स्ट्रोक व मौत का खतरा बढ़ सकता है। 
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हृदय रोगों की समस्या - फोटो : Freepik.com

किन्हें खतरा अधिक?

पहले से हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं के अलावा उच्च रक्तचाप, टाइप-2 डायबिटीज, असामान्य कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से ग्रस्त महिलाओं में हार्ट फेलियर का जोखिम अधिक रहता है।
 

  • गर्भावस्था के दौरान अधिक आयु में मातृत्व, जुड़वां या बहु-भ्रूण गर्भ, हृदय रोग से जुड़े आनुवंशिक बदलाव, सहायक प्रजनन तकनीकों का उपयोग तथा समयपूर्व प्रसव रोकने वाली दवाओं का लंबे समय तक इस्तेमाल भी जोखिम बढ़ाता है।
  • पहले से हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं में लगभग 11 प्रतिशत को गर्भावस्था या प्रसवोत्तर अवधि में हार्ट फेलियर की समस्या हो सकती है।
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दिल की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : adobe stock images

32 गुना ज्यादा बढ़ जाता है खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट फेलियर की पहचान और उपचार में देरी मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार हार्ट फेलियर से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में प्रसव के आसपास मृत्यु का खतरा अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में लगभग 32 गुना अधिक होता है।

इसके अलावा अनियमित हृदय गति, स्ट्रोक, हृदय की कार्यक्षमता में गिरावट, समयपूर्व प्रसव, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव, संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहले साल में संतुलित और पौष्टिक भोजन, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना सभी महिलाओं के लिए जरूरी है। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लेनाना, पर्याप्त नींद और हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियां शरीर को तेजी से रिकवर करने में मदद करती हैं।



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स्रोत:
Heart Failure Occurring in the Perinatal Period: A Scientific Statement From the American Heart Association


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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