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Cancer Diagnosis: एआई का कमाल, अब स्मार्टफोन से मिनटों में पता चल जाएगा कहीं आपको जानलेवा कैंसर तो नहीं?

Sun, 28 Jun 2026 10:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 28 Jun 2026 10:13 PM IST
सार

दुनियाभर में स्किन कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। डॉक्टर लंबे समय से कहते आए हैं कि इस बीमारी के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण है रोग की समय पर पहचान। इसी चुनौती का समाधान लेकर आई है एक नई एआई आधारित स्मार्टफोन तकनीक। इससे आसानी से स्किन कैंसर की पहचान की जा सकेगी।

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Derm Zero new AI smartphone app that can diagnose Deadly skin cancers at home
कैंसर का कैसे पता चलेगा? - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

कैंसर हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की जान ले रहा है। अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। पुरुषों में प्रोस्टेट और फेफड़ों का कैंसर प्रमुख है, जबकि महिलाओं में स्तन (ब्रेस्ट) और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इसके अलावा दुनियाभर में स्किन कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर भी विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं।

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आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि हर साल स्किन कैंसर के 15 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आते हैं और 1.20 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं। इसे मुख्य रूप से मेलेनोमा और नॉन-मेलेनोमा कैंसर सबसे ज्यादा रिपोर्ट किया जाता रहा है।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस बीमारी की समय पर पहचान बहुत जरूरी है। जितनी जल्दी बीमारी पकड़ में आती है, मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। हालांकि चिंताजनक बात ये है कि ज्यादातर लोगों में इसका पता ही तब चल पाता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।
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ऐसे लोगों के लिए एआई काफी मददगार साबित हो सकती है। अब मोबाइल फोन से ही पता चल जाएगा कि कहीं आप भी तो इस जानलेवा बीमारी का शिकार नहीं हैं?

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स्किन कैंसर का कैसे पता लगाएं? - फोटो : Adobe Stock

एआई आधारित स्मार्टफोन तकनीक से कैंसर का लगेगा पता

क्या सिर्फ स्मार्टफोन आपकी जान बचा सकता है? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी लग सकती है, लेकिन अब यह हकीकत बनती दिखाई दे रही है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अक्सर लोग त्वचा में होने वाले बदलावों पर ध्यान नहीं देते हैं। कई बार ऐसे लक्षणों के साथ कैंसर बढ़ता रहता है और डॉक्टर के पास जाने में हफ्तों-महीनों की देरी हो जाती है। इसी चुनौती के समाधान के लिए विशेषज्ञों की टीम ने एक नई एआई आधारित स्मार्टफोन तकनीक विकसित की है, जो मिनटों में बता देगी कि आपको स्किन कैंसर तो नहीं है?
 

  • अब सिर्फ एक साधारण स्मार्टफोन कैमरे की मदद से त्वचा पर मौजूद तिल, धब्बों और घावों की शुरुआती जांच जा सकती है। इसके लिए किसी महंगे कैमरे, विशेष लेंस या बड़े अस्पताल में जाने की जरूरत भी नहीं होगी। 
  • इस एआई तकनीक को हजारों मेडिकल तस्वीरों के साथ पहले से ही ट्रेन किया गया है ताकि वह संदिग्ध निशानों को पहचानकर बता सके कि किस मरीज को तुरंत विशेषज्ञ के पास जाने की जरूरत है और किसे नहीं।
  • इससे न सिर्फ मरीजों को जल्दी राहत मिलेगी बल्कि अस्पतालों पर बढ़ता दबाव और लंबी वेटिंग लिस्ट भी कम हो सकती है।

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हेल्थ केयर में एआई तकनीक - फोटो : Freepik.com

'ड्रेम जीरो' से स्किन कैंसर का निदान

ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) पहले भी इसी तकनीक के पुराने वर्जन ड्रेम जीरो (Derm Zero) का इस्तेमाल कर चुकी है। इसकी मदद से 2.3 लाख से ज्यादा मरीजों की जांच की गई, जिनमें लगभग 20,000 स्किन कैंसर के मामलों की पहचान हुई।
 

  • हालांकि पुराने सिस्टम में स्मार्टफोन के साथ एक खास कैमरा लेंस लगाना पड़ता था।
  • अब इस तकनीक का नया संस्करण आ गया है, जिसमें  किसी अतिरिक्त कैमरा लेंस की जरूरत नहीं होगी। इसे यूरोप में मंजूरी भी मिल चुकी है।
  • इसका मतलब है कि अब कोई भी व्यक्ति अस्पताल जाए बिना, अपने नजदीकी डॉक्टर या फार्मेसी में सिर्फ स्मार्टफोन से कुछ सेकंड में क्लिनिकल-ग्रेड जांच करा सकेगा।

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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos

कैसे काम करती है ये तकनीक

इस सॉफ्टवेयर को ब्रिटेन की हेल्थकेयर कंपनी स्किन एनालिटिक्स ने तैयार किया है। इसे हजारों ऐसी तस्वीरें दिखाकर ट्रेन किया गया है, जिनमें पहले से पता था कि मरीज को कौन-सी बीमारी थी।
 

  • यह एआई शरीर पर मौजूद तिल और त्वचा पर बने  घाव, धब्बे या गांठ की तस्वीरों का विश्लेषण करता है। यह उन खास पैटर्न को पहचानता है जो स्किन कैंसर या त्वचा की दूसरी बीमारियों से जुड़े होते हैं।
  • अगर किसी तिल या धब्बे में कैंसर जैसी कोई आशंका नहीं होती, तो सॉफ्टवेयर उसे साफ तौर पर सुरक्षित बता देता है।
  • अगर किसी जगह पर कैंसर होने का शक होता है, तो उसे डॉक्टर की आगे की जांच के लिए चिन्हित कर दिया जाता है।


कंपनी के मुताबिक इस सॉफ्टवेयर की सटीकता 98.9 प्रतिशत है। यानी 100 लोगों की जांच में यह लगभग 97 लोगों में स्किन कैंसर की सही पहचान कर लेता है।

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स्किन कैंसर का कैसे पता लगाएं? - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस बीमारी के ज्यादातर मामले सूरज की अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणों के अधिक संपर्क के कारण सामने आते हैं।  पिछले साल अकेले ब्रिटेन में इस कैंसर के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। पिछले 10 वर्षों में नए मरीजों की संख्या लगभग एक-तिहाई बढ़ गई है।
 

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर शरीर पर कोई नया तिल (मोल) दिखाई दे या पहले से मौजूद तिल का आकार, रंग या आकृति बदलने लगे तो ये स्किन कैंसर का संकेत हो सकता है।
  • मेलानोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन यह उन जगहों पर ज्यादा देखने को मिलता है जो अक्सर धूप के संपर्क में रहती हैं।


इंग्लैंड के एमर्शम हॉस्पिटल की त्वचा रोग विशेषज्ञ और कैंसर क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. एलेक्जेंड्रा केम्प ने कहा, मैंने अपने करियर में हजारों त्वचा संबंधी गांठों और धब्बों की जांच की है कि कहीं वे स्किन कैंसर तो नहीं हैं। जब से हमने अपने स्किन कैंसर जांच सिस्टम में ड्रेम तकनीक को शामिल किया है, तब से हमारे काम करने की क्षमता काफी बढ़ी है। इससे मरीजों को पहले से ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से इलाज मिल पा रहा है।

हम जानते हैं कि स्किन कैंसर में जितनी जल्दी बीमारी का पता चलता है, इलाज के सफल होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। अब यही तकनीक बिना किसी विशेष उपकरण के सीधे स्मार्टफोन पर उपलब्ध हो रही है। इससे भविष्य में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जांच की सुविधा पहुंच सकेगी और बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही लगाया जा सकेगा।




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स्रोत:
Digital medical device for cancer detection certified for smartphone use


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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