मानसून की शुरुआत होते ही मच्छर जनित रोगों का खतरा भी बढ़ने लग जाता है। जुलाई से अक्तूबर तक देश में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। झारखंड में मलेरिया रोग फैलने और इसके कारण मौत के मामले सामने आ रहे हैं।
Malaria Risk: झारखंड में मलेरिया ने ले ली तीन बच्चों की जान, जानिए इस बीमारी से कैसे करें बचाव
झारखंड में सेरेब्रल मलेरिया से कम से कम तीन बच्चों की मौत हो गई है, कई गांवों में नए मामले सामने आने और कई बच्चों के गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती होने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर जांच और निगरानी शुरू कर दी है।
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बरसात के दिनों में मलेरिया की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर साल मानसून आते ही अस्पतालों में बुखार के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगती है और इनमें बड़ी संख्या मलेरिया के मामलों की होती है। अक्सर लोग शुरुआत में इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।
- मलेरिया, मच्छरों से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। यह मुख्य रूप से संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है।
- इसके कारण तेज बुखार, ठंड लगने, कंपकंपी, पसीना आने, कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
- यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह संक्रमण मस्तिष्क, किडनी, फेफड़ों और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है।
बरसात के दिनों में मच्छरों का खतरा
बरसात के मौसम में जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। यही ठहरा हुआ पानी मच्छरों के अंडे देने और तेजी से बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। यही वजह है कि मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ती है और मलेरिया का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) वाले लोग इस बीमारी से अधिक प्रभावित हो सकते हैं। मलेरिया से काफी हद तक बचाव संभव है। घर और आसपास पानी जमा न होने देना और मच्छरों से बचाव के उपाय इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है।
कैसे की जाती है मलेरिया की पहचान
मलेरिया के शुरुआती लक्षण में सामान्य वायरल की तरह ही बुखार होता है।
- हालांकि समय के साथ तेज बुखार के साथ ठंड लगने, कंपकंपी की समस्या बढ़ जाती है।
- कुछ लोगों को अत्यधिक पसीना आने, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, मतली और उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
- शाम के समय तेज कंपकंपी के साथ बुखार होना इसका सबसे आम संकेत माना जाता है।
मलेरिया से बचाव कैसे करें?
मच्छरों से बचाव को मलेरिया की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है। इसके लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर का पानी नियमित बदलें, पानी की टंकियों को ढककर रखें और पुराने टायर या डिब्बों में पानी जमा न होने दें।
- रात में मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरी बाजू के कपड़े पहनें और मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- बरसात के मौसम में डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल संक्रमण के कारण भी मलेरिया जैसी दिक्कतें होती हैं इसलिए समय रहते डॉक्टर से मिलकर जांच और इलाज जरूर कराएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।