लिवर हमारे शरीर का ऐसा अंग है, जो चुपचाप दिन-रात अपना काम करता रहता है। हम क्या खाते हैं, कितना खाते हैं और कितना एक्टिव रहते हैं, इसका असर भी लिवर पर पड़ता है। आजकल फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन ज्यादा होना, अनहेल्दी खानपान, शराब और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतें इसके जोखिम को बढ़ा रही हैं। कई लोगों को तो पता भी नहीं चलता कि उनके लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो चुका है।
Liver Disease: फैटी लिवर वालों के लिए अच्छी खबर, विशेषज्ञों ने बताया आसान तरीका जिससे लिवर भी बोलेगा थैंक्यू
फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित व्यायाम बेहद फायदेमंद हो सकता है। अध्ययन के मुताबिक, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की शारीरिक गतिविधि लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने और लिवर की सेहत सुधारने में मदद कर सकती है।
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नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज
आंकड़ों के अनुसार दुनिया की करीब 32 फीसदी आबादी नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की शिकार है। इस समस्या पर ध्यान न देने या समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह सिरोसिस, लिवर स्कारिंग और कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। वैसे तो इस बीमारी के लिए प्रभावी तौर पर कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, हालांकि शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यायाम की आदत बनाने से रोगियों को फैटी लिवर की समस्या को कम करने, शारीरिक फिटनेस और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में विशेष मदद मिल सकती है।
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के नाम से जाना जाता है।
शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर से बचा सकती है
विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को रोजाना 30 मिनट और सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के व्यायाम की आदत बनानी चाहिए।
- व्यायाम का हमारे शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव होता है इसको जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में 150 मिनट के मध्यम स्तरीय व्यायाम की आदत लिवर के फैट को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए शोध के अनुसार संपूर्ण फिटनेस के साथ-साथ लिवर की समस्याओं को कम करने में भी व्यायाम की भूमिका हो सकती है। स्वास्थ विशेषज्ञ कहते हैं, इस परिणाम के आधार पर माना जा सकता है कि जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या है, उनके लिए यह सहायक उपचार की तकनीक हो सकती है।
पहले के शोध में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर की समस्याओं को कम करने में लाभकारी हो सकती है, पर उन अध्ययनों में कितने व्यायाम की जरूरत है, यह स्पष्ट नहीं था।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
एसोसिएट प्रोफेसर और हेपेटोलॉजिस्ट जोनाथन स्टाइन कहते हैं, नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के रोगियों को व्यायाम से लाभ मिल सकता है। हमारे निष्कर्ष के आधार पर ऐसे रोगियों के इलाज के लिए चिकित्सक दवाइयों के साथ व्यायाम करने का सुझाव दे सकते हैं। लिवर की बढ़ती समस्याओं को कम करने में जीवन शैली में सुधार की विशेष भूमिका मानी जाती है।
अगर हम सभी नियमित व्यायाम की आदत बना लेते हैं तो भविष्य में फैटी लिवर की समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
योग-व्यायाम से सेहत में होता है सुधार
इस शोध के लिए 14 अध्ययनों की समीक्षा की गई। फैटी लिवर की समस्या वाले रोगियों की आयु, लिंग, बॉडी मास इंडेक्स, शरीर के वजन में बदलाव जैसे कारकों के डेटा का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों ने नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाया उनमें लिवर से संबंधित बिमारियों का जोखिम कम पाया गया।
अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि एरोबिक व्यायाम के साथ योग को भी दिनचर्या में शामिल करके लाभ पाया जा सकता है। बालासन (चाइल्ड पोज), अनुलोम विलोम प्राणायाम और धनुरासन (बो पोज) जैसे अभ्यास की आदत को भी लिवर की सेहत को बेहतर रखने के लिए फायदेमंद पाया गया है।
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स्रोत:
Exercise in the Management of Metabolic-Associated Fatty Liver Disease (MAFLD) in Adults: A Position Statement from Exercise and Sport Science Australia
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