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Child Health: क्या आपका बच्चा भी चॉकलेट का दीवाना है? ये आदत कहीं उसकी सेहत पर न पड़ जाए भारी

Thu, 16 Jul 2026 06:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 16 Jul 2026 06:34 PM IST
सार

 चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमीन भी होती है, जो संवेदनशील बच्चों में बेचैनी, नींद की परेशानी या अधिक उत्तेजना का कारण बन सकती है। इसके अलावा अत्यधिक कैलोरी का सेवन लंबे समय में वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।

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ज्यादा चॉकलेट तो नहीं खाता आपका बच्चा? - फोटो : Amarujala.com/AI

क्या आपका बच्चा भी दिनभर में 3-4 चॉकलेट खा लेता है? जन्मदिन हो या  फिर किसी बात पर बच्चे को खुश करना हो, अक्सर आप भी उसे चॉकलेट थमा देते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि यही मीठी खुशी बच्चे की सेहत के लिए धीरे-धीरे परेशानी का कारण भी बन सकती है?



डॉक्टर कहते हैं, चॉकलेट बच्चों का भले ही पसंदीदा हो, पर इसमें मौजूद चीनी और हाई कैलोरी कई बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) कहता है बच्चों को एडेड शुगर वाली चीजें नहीं देनी चाहिए। विशेषतौर पर ज्यादा चॉकलेट खाने से बच्चों में मोटापा, दांतों की सड़न और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती है। 

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री बार-बार मीठी चीजें खाने से दांतों पर प्लाक बनाने वाले बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं, जो एसिड बनाकर दांतों की ऊपरी परत (एनामेल) को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर आपका बच्चा भी खूब चॉकलेट खाता है तो सावधान हो जाइए।

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बच्चों को न दें ज्यादा चॉकलेट - फोटो : Freepik.com

ज्यादा चॉकलेट तो नहीं खा रहा आपका बच्चा?

डॉक्टर कहते हैं, ज्यादा चॉकलेट खाने से बच्चों की भूख प्रभावित हो सकती है। वे पौष्टिक भोजन कम खाने लगते हैं जिससे शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल, प्रोटीन तथा फाइबर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। 
 

  • कुछ चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमीन भी होती है, जो संवेदनशील बच्चों में बेचैनी, नींद की परेशानी या अधिक उत्तेजना का कारण बन सकती है। 
  • इसके अलावा अत्यधिक कैलोरी का सेवन लंबे समय में वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम भी बढ़ा सकता है।


हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चों को चॉकलेट पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए। सीमित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ कभी-कभार चॉकलेट खाना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। पर ज्यादा चॉकलेट उनके लिए समस्याओं का कारण बन सकती है।

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बच्चों में दांतों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com

दांतों में कैविटी का खतरा सबसे ज्यादा

बार-बार चॉकलेट खाने से दांतों पर मौजूद बैक्टीरिया चीनी को एसिड में बदल देते हैं। यही एसिड दांतों के एनामेल को धीरे-धीरे घिसता है और कैविटी बनने लगती है। 
 

  • यदि बच्चा चॉकलेट खाने के बाद कुल्ला या ब्रश नहीं करता, तो यह जोखिम और बढ़ जाता है। 
  • चॉकलेट दांतों से लंबे समय तक चिपकी रहती है, जिससे बैक्टीरिया को ज्यादा समय तक चीनी मिलती रहती है। 
  • ज्यादा चॉकलेट खाने वाले बच्चों के दांतों परभूरे धब्बे, ठंडा-गरम लगने और दर्द की समस्या बढ़ जाती है।
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बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock

मोटापा और नींद की समस्या

अधिकांश मिल्क चॉकलेट में चीनी और कैलोरी काफी ज्यादा होती है। यदि बच्चा रोज कई चॉकलेट खाता है और शारीरिक गतिविधि कम करता है, तो अतिरिक्त कैलोरी शरीर में जमा होकर वजन बढ़ा सकती है। बचपन का मोटापा आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। 
 

  • इसी तरह से कुछ चॉकलेट में कैफीन और थियोब्रोमीन मौजूद होती है। रात के समय ज्यादा चॉकलेट खाने से नींद आने में परेशानी, बेचैनी या अधिक सक्रियता देखी जा सकती है।
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बच्चों के खान-पान पर रखें ध्यान - फोटो : freepik

पैकेट बंद खाद्य पदार्थ भी पहुंचा रहे नुकसान

डॉ. कहते हैं, कि अभिभावक बच्चों को रेडी-टू-ईट (पैकेट बंद) खाद्य पदार्थ अधिक देते हैं जो दांतों से चिपक जाते हैं। खाने के बाद बच्चे पानी नहीं पीते और कुल्ला भी नहीं करते। ऐसे में बच्चों के दांतों में खाद्य पदार्थ चिपका रह जाता सड़न शुरू होने लगती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को पैक्ड फूड में चॉकलेट, बिस्किट, चिप्स आदि देने की बजाय पारंपरिक भोजन जैसे, दाल, चावल, पराठे, रोटी, सब्जी आदि खिलाना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान
 

  • बच्चों को पैक्ड फूड खिलाना बंद कर दें या कम कर दें।
  • बच्चों को कुछ खिलाने के बाद पानी से कुल्ला जरूर करवाएं।
  • सुबह और रात में सोने से पहले ब्रश करवाने की आदत डालें।
  • यदि एक दांत में समस्या हुई है तो डॉक्टर को जरूर दिखवा लें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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