Health Tips: उदासी हो या खुशी ये दोनों हमारी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं हैं, जिनसे हमारे मूड का पता चलता है। किसी दुख, चिंता में मन उदास हो जाता है, वहीं अपनों से मिलने, सफलता प्राप्त होने पर खुशी का एहसास होता है। पर कई बार हमारा मन बिना किस कारण के भी उदास महसूस करने लगता है। आखिर ऐसा क्यों होता है?
Health Alert: बेवजह उदास हो जाते हैं और बनी रहती है चिंता? जरूर जान लीजिए ये बातें वरना बढ़ सकती है दिक्कत
- कई बार हमारा मन बिना किस कारण के भी उदास महसूस करने लगता है। आखिर ऐसा क्यों होता है?
- डॉक्टर कहते हैं 'जब बिना वजह दिल भारी लगे, तो जरूरी है वजह को समझना।' आइए इसे समझते हैं।
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बिना कारण उदास होना
बिना कारण हर वक्त उदास रहना अवसाद के कारण भी हो सकता है। अगर यह समस्या दो सप्ताह से ज्यादा बनी रहती है तो यह गंभीर मानसिक स्थिति का रूप ले सकती है।
रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स में बदलाव आने से भी दिनभर उदासी हो सकती है, ऐसा ज्यादातर महिलाओं में होता है। कई बार लोग कुछ ऐसी परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं, जिनका समाधान उनके पास भी नहीं होता है। ऐसे में न चाहते हुए भी उन चीजों के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं और परेशान होने लगते हैं।
इसका कारण काम का तनाव, किसी करीबी का बीमार होना, रिश्ते से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक?
मौसम में बदलाव आने पर भी शरीर पर असर पड़ता है, जिससे जीवनशैली में बदलाव आता है। यह भी बेवजह उदास रहने और मूड बदलने का कारण बन सकता है।
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. एस धनंजय कहते हैं, जब बिना वजह दिल भारी लगे, तो जरूरी है वजह को समझना। डोपामिन और सेरोटोनिन की कमी अक्सर उदासी बने रहना का प्रमुख कारण हो सकता है। ये दो खास ‘फील गुड’ हार्मोन हैं। इनकी कमी से मूड खराब रहता है और लगातार थकावट या दुख का एहसास बना रहता है।
इसके अलावा थायरॉइड की समस्या या हार्मोनल असंतुलन भी आपके मूड को प्रभावित कर सकती है। खासकर महिलाओं में थायरॉइड, पीसीओएस या मेनोपॉज के कारण मूड में उतार-चढ़ाव और उदासी देखी जाती है।
अक्सर उदासी बने रहने के इन कारणों को भी जानिए
अक्सर उदास रहने, काम में मन न लगने या चिंतित रहने के पीछे कई और भी कारण हो सकते हैं जिनके बारे में समझना जरूरी है।
नींद की कमी या नींद में अनियमितता के कारण दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता और इसका सीधा असर मूड पर पड़ता है। अध्ययनों में कुछ प्रकार के विटामिन्स जैसे विटामिन-डी और बी12 की कमी को भी आपके मूड को प्रभावित करने वाला पाया गया है।
इसके अलावा बार-बार खुद को दोष देना, भविष्य को लेकर चिंता करना या पुराने अनुभवों को दोहराते रहना भी उदासी को बढ़ाता है।
क्या है उपाय?
डॉक्टर कहते हैं उदासी की समस्या से बाहर आने के लिए करीबियों से अपनी भावनाएं साझा करें। मनपसंद गाने सुनें या मनपसंद कार्यों में ध्यान लगाएं। समस्या बढ़ने पर मनोवैज्ञानिक से संपर्क जरूर करें। अगर यह उदासी हफ्तों तक लगातार बनी रहती है, तो यह क्लिनिकल डिप्रेशन भी हो सकता है जिसे इलाज की जरूरत होती है, इसे अनदेखा बिल्कुल न करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।