Joint Pain: कम उम्र के लोगों में भी क्यों बढ़ रहा है ज्वाइंट पेन की बीमारी, जानें क्या कहते हैं शोध
Joint Pain at a Young Age:आज के समय में खराब दिनचर्या और खानपान की वजह से कम उम्र में ही जोड़ों में दर्द होना आम हो गया है। बहुत से युवा लोग भी इस समस्या से परेशान हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
बढ़ता मोटापा और गलत पोस्चर
कम उम्र में जोड़ों का दर्द मोटापा का एक बड़ा कारण है। शरीर का अधिक वजन घुटनों, कूल्हों और टखनों पर अत्यधिक दबाव डालता है, जिससे कार्टिलेज तेजी से घिसने लगता है। इसके अलावा घंटों तक गलत पोस्चर में बैठकर काम करना भी गर्दन, पीठ और कंधों के जोड़ों में दर्द का कारण बनता है।
ये भी पढ़ें- Eye Problems: बच्चों के आंखों की रोशनी बचाना है तो अनदेखा न करें ये शुरुआती लक्षण, सभी माता-पिता दें ध्यान
पोषण की कमी और कमजोर हड्डियां
आज के दौर में फास्ट फूड और जंक फूड का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे शरीर में कैल्शियम, विटामिन डी और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी हो रही है। विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, जबकि कैल्शियम की कमी से हड्डियों का घनत्व (बोन डेंसिटी) कम हो जाता है, जिससे जोड़ों में दर्द और अकड़न महसूस होती है।
ये भी पढ़ें- Depression In Men: 'मजबूत' दिखने के दबाव में पुरुष कैसे छिपाते हैं अपने डिप्रेशन के लक्षण? विशेषज्ञ से जानें
शारीरिक निष्क्रियता और अत्यधिक तनाव
हमारी आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गई है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना जोड़ों को कठोर बनाता है और उनमें लचीलेपन की कमी आती है। दूसरी तरफ तनाव भी जोड़ों के दर्द को बढ़ा सकता है। तनाव से शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ती है, जो जोड़ों के दर्द का एक प्रमुख कारण है।
इस समस्या से बचने के लिए हमें अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है। सबसे पहले वजन को नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम करें, जिसमें योग, स्ट्रेचिंग और पैदल चलना शामिल हो। अपने आहार में कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर चीजें शामिल करें। साथ ही सही पोस्चर में बैठें और काम के बीच में ब्रेक लेना न भूलें।
स्रोत और संदर्भ
Osteoarthritis in Young
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
