मैदा या रिफाइंड आटा हमारी सेहत के लिए हानिकारक है, ये हम सभी अक्सर सुनते रहते हैं। पर क्यों, कभी आपने इस बारे में सोचा?
Eating Habits: हर दिन खा रहे हैं ब्रेड और बिस्कुट? क्या मैदा वाली चीजें वास्तव में नुकसानदायक हैं
मैदा गेहूं का अत्यधिक रिफाइंड रूप है। इसे बनाने के दौरान गेहूं के बाहरी चोकर को हटा दिया जाता है। जिससे इसकी पौष्टिकता काफी कम हो जाती है। क्या आप भी रोज मैदा वाली चीजें खाते हैं?
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मैदा वाली चीजों से क्या दिक्कतें होती हैं?
डॉक्टर कहते हैं, ऐसा नहीं है कि एक बार मैदा खाने से कोई बीमारी हो जाएगी। हालांकि जब अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और मैदा वाली चीजों का हम रोजाना और अधिक मात्रा सेवन करने लगते हैं तो ये दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। ऐसी चीजों में नमक, चीनी और फैट की मात्रा ज्यादा होती है। इससे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
मैदा में चूंकि शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व भी नहीं होते हैं ऐसे में इसके सेवन से सेहत को ज्यादा लाभ भी नहीं मिल पाता।
- आहार विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर मैदा वाली चीजें खाने के बाद आपको पेट फूलने और कब्ज की दिक्कत हो सकती है। इसका कारण फाइबर की कमी है। लो फाइबर के कारण कब्ज, जल्दी भूख लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि आहार में फल, सब्जियां और साबुत अनाज की कमी हो तो पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
डायबिटीज वालों के लिए नुकसानदायक है मैदा
मैदा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। इसका मतलब है कि इससे बनी चीजें खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ सकता है।
- अग्न्याशय को इसे नियंत्रित करने के लिए अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है।
- लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।
- जिन लोगों को पहले से डायबिटीज की दिक्कत है मैदा वाली चीजें उनकी स्वास्थ्य समस्याओं को और भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
मैदा वाली चीजें खाने के और क्या नुकसान हैं?
मैदा से बनी अधिकांश चीजों में कैलोरी, चीनी, नमक और फैट की मात्रा अधिक होती है। इन्हें बार-बार खाने से शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है।
- अध्ययनों से पता चलता है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और मैदा वाली चीजें ज्यादा खाने से हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
- मैदा में फाइबर बहुत कम होता है। फाइबर मल को मुलायम बनाने और आंतों की गति को सामान्य रखने में मदद करता है। यही कारण है कि इससे कब्ज की समस्या हो सकती है।
कैसे रखें सेहत का ख्याल?
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, कभी-कभार मैदा वाली चीजें खाई जा सकती हैं। हालांकि मैदा की जगह साबुत गेहूं का आटा, मल्टीग्रेन आटा, ओट्स और अन्य मोटे अनाज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन और मिनरल अधिक होते हैं। इनके नियमित सेवन से पाचन बेहतर रहता है, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने में मदद मिलती है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।