'आज इंसान सभ्यता के जिस मुकाम पर है, वो सिर्फ इसलिए है क्योंकि हमने अपना खाना पका कर खाना सीख लिया।' ब्रिटेन की ससेक्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेना मैचियोकी की इस बात से दुनिया के तमाम जीव वैज्ञानिक इत्तिफाक रखते हैं। जेना कहती हैं कि, 'जब हम सिर्फ कच्चा खाना खाते थे। तो हमें लगातार खाते रहना होता था। क्योंकि कच्चे खाने से हमारे शरीर को पोषक तत्व हासिल करने का संघर्ष करना पड़ता था।'
खाना पकाने के वे खतरे जिनसे अंजान हैं ज्यादातर लोग, क्या आप रखते हैं इन बातों का ध्यान?
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खाने को पकाने के हुनर से इंसान के जबड़े छोटे हो गए। मगर उसका जहन बड़ा हो गया। और इस जहन के काम करने के लिए जरूरी ऊर्जा पका हुआ खाने से मिलने लगी। कच्चे खाने में बहुत से बैक्टीरिया और दूसरे रोगजनक हो सकते हैं। पका कर खाने के दौरान वो सब मर जाते हैं। तो इंसानों पर बीमारियों का कहर भी कम हो गया। अब इंसान को पोषक तत्व आसानी से मिलने लगे, तो इस एनर्जी का इस्तेमाल वो दिमाग चलाने में करने लगा। शरीर के कुल हिस्से का महज दो फीसद होने के बावजूद, वो शरीर की कुल ऊर्जा का 20 फीसद चट कर जाता है।
एक्रिलेमाइड
ये एक ऐसा केमिकल है, जो औद्योगिक काम में इस्तेमाल होता है। मगर ब्रिटेन की फूड स्टैंडर्ड एजेंसी ने एक्रिलेमाइड को लेकर चेतावनी जारी है। अगर खाने को बेहद ऊंचे तापमान पर भूना, तला या ग्रिल किया जाता है, तो उसमें ये खतरनाक केमिकल बनने लगता है। एक्रिलेमाइड से कैंसर होने का खतरा होता है। जिन चीजों में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा होता है, उनमें ये केमिकल बनने का डर अधिक होता है। जैसे कि आलू, जड़ वाली सब्जियां, टोस्ट, अनाज, कॉफी, केक और बिस्कुट। ज्यादा भूनने या पकाने पर ये सभी सुनहरे भूरे होने लगते हैं। ये इस बात का संकेत है कि इनमें एक्रिलेमाइड बनने लगा है। इस खतरे से बचने का एक तरीका ये है कि आप खाने को ज्यादा देर तक न पकाएं। स्टीम करें। बहुत ज्यादा भून कर खाने से बचें।
रसोई का धुआं और कैंसर
विकासशील देशों में खास तौर से चूल्हे बीमारियों की बड़ी वजह होते हैं। लकड़ी, कोयला या कचरा जलाकर खाना पकाने से निकलने वाला धुआं फेफड़ों के कैंसर का सबब बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, रसोई से उठने वाला धुआं हर साल करीब 38 लाख लोगों की मौत का जिम्मेदार होता है। इसके अलावा खाना पकाने के दौरान अन्य चीजों से निकलने वाला धुआं भी घातक हो सकता है।