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क्या है मानवाधिकार दिवस, कैसे हुई इसकी शुरुआत

Tue, 10 Dec 2019 02:02 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: निलेश कुमार Updated Tue, 10 Dec 2019 02:02 PM IST
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Human rights day 2019 in india theme how it started
Human Rights - फोटो : Pixabay

आज अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस है। दुनिया भर में हर साल 10 दिसंबर को यह विशेष दिवस मनाया जाता है। आज ही के दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र के 56 सदस्यों ने मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की थी। हर साल इस दिवस की थीम निर्धारित रहती है, जैसे कि इस साल की थीम है- स्थानीया भाषा का साल: मानव अधिकारों की संस्कृति को बढ़ावा देना और इसे और अधिक मजबूत बनाना। आइए, जानते हैं मानवाधिकार दिवस के बारे में विस्तार से:

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मानवाधिकार (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

मानवाधिकार आखिर है क्या?
व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए अधिकारों को मानवाधिकार कहा जाता है। अपने देश में संविधान के भाग तीन में दर्ज मूलभूत अधिकार इसके दायरे में आते हैं। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की ओर से अंतरराष्ट्रीय समझौते के बाद भी कई सारे अधिकारों को मानवाधिकार में शामिल किया गया है। जैसे कि प्रदुषण मुक्त वातावरण में जीने का अधिकार, पुलिस या न्यायिक अभिरक्षा में यातनापूर्ण और अपमानजनक व्यवहार न होने का अधिकार, महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार आदि। इन अधिकारों का हनन होने पर मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

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दुनिया के हर व्यक्ति को समानता से जीने का अधिकार है। मानवाधिकार के तहत लोगों को उनकी बुनियादी जरूरतें सुनिश्चित की जाती है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होता है कि देश, राज्य के नागरिकों की बुनियादी जरुरतें पूरी होगी। मानवाधिकार के तहत लोगों को भोजन, आवास, मकान और शिक्षा जैसे जरूरी साधन की भी गारंटी दी जाती है। कई बार सरकार, प्रशासन और व्यवस्था नागरिकों का उत्पीड़न करती है तो ऐसी स्थिति में मानवाधिकार के तहत लोगों की आजादी और समानता की सुरक्षा होती है।

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प्रोफेसर हेनकिन का योगदान
अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में प्रोफेसर हेनकिन का भी अहम योगदान माना जाता है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कानून विद्यापीठ में एक शिक्षक के रूप में अपने पांच दशक के करियर में उन्होंने इस क्षेत्र में बहुत काम किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय कानून की रूपरेखा तय करने में उनकी अहम भूमिका रही थी। इसलिए उन्हें 'फादर आॅफ ह्यूमन राइट्स' भी कहा जाता है।

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मानवाधिकार आयोग क्या है और यह कैसे काम करता है
मानवाधिकारों की रक्षा के लिए 28 अक्टूबर 1993 को देश में मानव अधिकार अध्यादेश के संरक्षण के तहत एक स्वायत्त संस्था का गठन किया गया, जिसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग कहा जाता है। किसी पीड़ित या उसकी ओर से अन्य व्यक्ति द्वारा दायर की गई याचिका पर आयोग सुनवाई और कार्यवाही करता है। इसके अलावा अदालत की स्वीकृति से मानवाधिकार हनन संबंधित मामलों में हस्तक्षेप भी करता है। वहीं, आयोग को जेल का निरीक्षण करने का भी अधिकार है।
 

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