गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के लिए बहुत सारे परिवर्तनों का समय होता है। इस समय शरीर में ढेर सारे हार्मोनल बदलाव भी हो रहे होते हैं और नींद, भूख सबका रूटीन भी बदल सकता है। कई बार किसी विशेष प्रकार की चीज को खाने का मन करता है तो कई बार कुछ खाने का मन नहीं करता, कभी तो खाने के नाम से ही जी मिचलाने लगता है। लेकिन भोजन और वह भी पौष्टिक भोजन इस समय बच्चे और माँ दोनों के लिए बहुत जरूरी होता है। स्त्रियों को अधिकांशतः शुरुआत के तीन महीनों में भोजन से अरुचि या नॉशिया जैसी दिक्क़तें हो सकती हैं लेकिन इसके लिए डॉक्टर विकल्प सुझाते हैं।
Pregnancy: गर्भावस्था में बार-बार लगे भूख तो रखें इन बातों का ध्यान, डाइट में शामिल करें ये पोष्टिक आहार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वाद और सेहत दोनों पर ध्यान
घर में रखा नमकीन, चिप्स का पैकेट, कुकीज, आइसक्रीम, केक आदि जैसी चीजों को गर्भावस्था के दौरान भी कभी कभार खाना गलत नहीं है लेकिन इनका जरूरत से ज्यादा सेवन कई सारी समस्याएं खड़ी कर सकता है। गर्भावस्था में थोड़ा बढ़ता वजन चिंता का विषय नहीं है लेकिन गलत खान पान से जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ सकता है जो डायबिटीज, स्किन प्रॉब्लम्स, जोड़ों की समस्या के अलावा प्रसव के दौरान भी मुश्किल खड़ी कर सकता है। जंक फ़ूड या बाजार का नाश्ता उतना पोषण भी नहीं देता जितना इस स्थिति में चाहिए। इसलिए जरूरी है कि नाश्ते या छिटपुट खाने के लिए चयन सही पदार्थों को लेकर हो। ऐसे में कुछ विकल्प बहुत मददगार हो सकते हैं।
फलों की चाट, कस्टर्ड या फ्रूट सलाद
फल ढेर सारे पोषण के साथ आते हैं। इनसे विटामिन्स, मिनरल्स और फाइबर तो भरपूर मात्रा में मिलते ही हैं, पानी भी मिलता है जो गर्भावस्था में और भी जरूरी होता है। सबसे अच्छा चुनाव हैं मौसमी फल। इन्हें अच्छी तरह धोएं और काटें, फ्लेवर और स्वाद के लिए थोड़ी सी क्रीम, नीबू, चाट मसाला, काली मिर्च, नमक, चीज आदि मिलाया जा सकता है और एक हेल्दी नाश्ता तैयार हो जाता है। कोशिश करें कि एक बार में कम से कम दो तरह से फल मिलाकर खाएं। इससे स्वाद ग्रंथियों को संतुष्टि मिलेगी। इसके अलावा आप खूब सारे फल डालकर कस्टर्ड बनाकर फ्रिज में रख सकती हैं और कम से कम 2-3 दिन इसका थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सेवन कर सकती हैं।
पापड़, मठरी और खाखरे
घर पर सेककर खाएं या हल्का सा तेल लगाकर मसाला पापड़ बना लें। मूंग दाल, चना, बाजरा, ज्वर, मक्का आदि का पापड़ आपको पेट भरने की संतुष्टि भी देगा और स्वाद भी। आप इस पर ताजा टमाटर, प्याज, धनिया पत्ती और किसा हुआ नारियल या चीज भी डालकर खा सकती हैं। इसी तरह सभी तरह के आटे मिलाकर बनाई गई मठरी और खाखरे भी एक बढ़िया विकल्प हो सकते हैं। कोशिश करें कि ये घर पर ही बने हुए हों। आजकल तो इन्हें सामग्री देकर घर पर बनवाया भी जा सकता है। बाजार के पैक्ड चिप्स की जगह क्रिस्पी पापड़ और खाखरे ज्यादा पोषण देंगे।
लस्सी, फ्रूट रायता या योगर्ट
एक ऐसा विकल्प जो पेट के लिए ढेर सारे फायदे लेकर आएगा। इससे माँ और शिशु दोनों को भरपूर मात्रा में कैल्शियम मिलेगा जो हड्डियों को मजबूत बनाएगा। यह याद रखना जरूरी है कि प्रसव के बाद अक्सर महिलाओं में कई कारणों से जोड़ों और हड्डियों के साथ दांतों की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में कैल्शियम से भरपूर भोजन बहुत मददगार साबित होता है। इससे आपको भरपूर मात्रा में प्रोटीन भी मिलेगा जो माँसपेशियों को मजबूत बनाने, त्वचा और बालों को सेहतमंद रखने, वजन को संतुलित रखने जैसे कई फायदे देगा। दही, लस्सी, योगर्ट या फ्रूट रायता जो भी लें उसमें ऊपर से अधिक शकर डालने से बचें। इसकी बजाय आप थोड़ी मात्रा में शहद डाल सकती हैं। साथ ही इसमें किशमिश, मुनक्का, अंजीर, खारक आदि डाल कर भी खा सकती हैं। घर में बनी पतली लस्सी भी बहुत फायदेमंद होगी लेकिन इसके अभाव में बाजार का योगर्ट भी लिया जा सकता है। इसी तर्ज पर घर में मौजूद फलों से स्मूदी भी बनाई जा सकती है।ध्यान बस यही रहे कि इंग्रेडिएंट्स ताजे हों और शकर ऊपर से अधिक न डले।